देश की खबरें | मेरी पुस्तकें अत्यधिक राजनीतिक स्वरूप की हैं :पौराणिक कथा लेखक आनंद नीलकंठन

युकसोम (सिक्किम), आठ मई लेखक आनंद नीलकंठन का कहना है कि समाज को आईना दिखाने की जिम्मेदारी पत्रकारों और लेखकों की है।

अपनी किताबों को अत्यधिक राजनीतिक स्वरूप की बताते हुए नीलंकठन ने यह भी कहा कि उन्होंने बच्चों के लिए जो किताबें लिखी हैं वे भी अत्यंत राजनीतिक स्वरूप की हैं।

‘सिक्किम कला एवं साहित्य महोत्सव’ में रविवार को ‘असुर’ के लेखक ने कहा कि समकालिक मुद्दों के बारे में बात करने के लिए वह अपनी रचनाओं में व्यंग्य का इस्तेमाल करते हैं।

उन्होंने अपनी पौराणिक पुस्तकों का हवाला देते हुए कहा, ‘‘यह एक पत्रकार, एक कहानीकार की जिम्मेदारी है कि वह समाज को आईना दिखाये...इसलिए जब मैं ‘बाहुबली’, ‘असुर’ या ‘अजेय’ लिखता हूं, तब गहन अध्ययन करने वाले लोग इसके अंदर छिपे अर्थ को समझ सकते हैं कि मैं उस समय के हस्तिनापुर की बात नहीं कर रहा। बल्कि मेरा हस्तिनापुर आज का भारत है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरी लंका आज का भारत है। मेरी किष्किंधा और माहिष्मति आज का भारत है।’’

नीलकंठन (49) ने कहा कि उनकी पुस्तकें राजनीतिक हैं जिनके किरदार पौराणिक आख्यानों के होने के बावजूद हमारे आसपास के लोगों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यहां तक कि मेरी लिखी बच्चों की पुस्तकें भी जब उनके माता-पिता दूसरी बार पढ़ते हैं तब उन्हें समझ आता है कि मैं कुछ और कहना चाह रहा था।’’

उन्होंने कहा ‘‘मेरी किताबें राजनीतिक हैं लेकिन मैं यह सामने नहीं कहूंगा। यह जानना लोगों का जिम्मा है। संवादात्मक होने पर कला गहन रूप ले लेती है। अगर मैं आपको सब कुछ बताने लग जाउंगा तो यह कला नहीं होगी।’’

उनकी सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों में बाहुबली त्रयी--‘द राइज ऑफ शिवगामी, ‘चतुरांगना’ और ‘क्वीन ऑफ माहिष्मति’--शामिल है। यह ‘बाहुबली’ फिल्म की आधिकारिक पूर्व कृति है।

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