मुजफ्फरपुर, चार अगस्त बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में लंगट सिंह कॉलेज स्थित 106 साल पुरानी खगोलीय वेधशाला को यूनेस्को धरोहर सूची में शामिल किया गया है।
पूर्वी भारत में अपनी तरह की पहली इस वेधशाला की स्थापना 1916 में उक्त कॉलेज परिसर में छात्रों को विस्तार से खगोलीय ज्ञान प्रदान करने के लिए की गई थी।
लंगट सिंह कॉलेज के प्राचार्य ओ. पी. रॉय ने बताया, ‘‘ वर्ष 1946 में कॉलेज में एक तारामंडल भी स्थापित किया गया था। 1970 के बाद वेधशाला के साथ-साथ तारामंडल की स्थिति धीरे-धीरे गिरने लगी और वहां स्थापित अधिकांश मशीनें या तो खो गई हैं या कबाड़ में तब्दील हो गई हैं।’’
उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वेधशाला का अवलोकन किया था और अधिकारियों को इसके जीर्णोद्धार के लिए अनुदान देने का आश्वासन दिया था, लेकिन इस दिशा में कुछ नहीं हुआ।
प्राचार्य ने कहा, ‘‘अब यूनेस्को की लुप्तप्राय धरोहर सूची में इस वेधशाला को शामिल होने के बाद हमें उम्मीद है कि राज्य सरकार इसके संरक्षण के लिए उचित कदम उठाएगी।’’
उन्होंने कहा कि यह हमारे कॉलेज के लिए एक महान क्षण है। इससे जुड़े हर कोई इस घटनाक्रम से खुश है।
कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षकों की राय है कि यूनेस्को की सूची में शामिल होने का श्रेय दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जे. एन. सिन्हा को भी जाता है।
रॉय ने कहा, ‘‘यूनेस्को का ध्यान वेधशाला की ओर आकर्षित करने के उनके निरंतर प्रयासों ने आखिरकार रंग लाया।’’
लंगट सिंह कॉलेज जो अब भीम राव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय से संबद्ध है की स्थापना 1899 में हुई थी।
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