नयी दिल्ली, 18 मार्च देशी तेल-तिलहनों की अधिक उत्पादन लागत तथा सबसे अधिक खाद्य तेलों के आयात वाले बंदरगाह कांडला पोर्ट पर खाद्य तेलों का स्टॉक बेहद मामूली रहने के बीच देश के तेल-तिलहन बाजारों में सोमवार को सरसों और मूंगफली जैसी देशी तेल-तिलहनों के दाम कमजोर रहे, वहीं आयातित सोयाबीन डीगम की प्रीमियम दाम पर बिकवाली होने से सोयाबीन तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन के दाम मजबूती दर्शाते बंद हुए। सोयाबीन तेल और बिनौला तेल के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।
मलेशिया एक्सचेंज में मजबूती चल रही है और शिकॉगो एक्सचेंज में घट-बढ़ है।
बाजार सूत्रों ने कहा कि थोक में सरसों लगभग 103 रुपये किलो (1,000 ग्राम) के भाव बिक रहा है और इसका खुदरा भाव लगभग 130-135 रुपये लीटर (910 ग्राम) है। इस बिक्री मूल्य के हिसाब से किसानों को 5,650 रुपये क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का दाम मिलना चाहिये था लेकिन सरसों किसानों को एमएसपी से लगभग 10-12 प्रतिशत कम कीमत की पेशकश की जा रही है। आज सरसों की आवक बढ़कर 15.50 लाख बोरी हो गई।
उन्होंने कहा कि थोक में खाद्य तेलों की खरीद किलो में की जाती है और खुदरा में उसे लीटर में बेचा जाता है। इस भार मानदंड के बदलने से तेल कंपनियों का माल एवं सेवा कर (जीएसटी) और पैकेजिंग का खर्च निकल आता है।
सूत्रों ने कहा कि देश के कांडला बंदरगाह पर खाद्य तेलों का स्टॉक काफी कम है जबकि पिछले साल मई-जून-जुलाई में 18-19 लाख टन प्रति माह खाद्य तेलों का भारी मात्रा में आयात हुआ करता था। मौजूदा समय में ऐसी क्या दिक्कत आयी कि स्टॉक बेहद कम रह गया है। लगता है कि जो लोग इन बातों पर नजर रखने के लिए जिम्मेदार थे, उन्होंने बारिकियों को नजरअंदाज किया, जिससे ऐन त्योहारों के समय ऐसी दिक्कत आ रही है।
सूत्रों ने कहा कि मौजूदा समय पर नजर डालेंगे तो पायेंगे कि सरसों की बुरी हालत हो रही है और इसकी बिक्री से किसानों को न्यायोचित दाम नहीं मिल रहे हैं। बेपड़ता कारोबार के कारण देशी तेल मिलों की हालत पस्त है। खाद्य तेलों के स्टॉक की कमी के बीच आयातित तेल- सोयाबीन डीगम बंदरगाहों पर 10-12 प्रतिशत प्रीमियम दाम पर बिक रहा है। इन सब बातों की ओर ध्यान देने की जरूरत है और इसकी किसी ना किसी की जवाबदेही होनी चाहिये जो आने वाली स्थितियों को भांपकर पूर्वसूचना दे सके। सिर्फ थोक दाम टूटने से स्थितियां नहीं बदली हैं बल्कि इससे तो सरसों, सोयाबीन, बिनौला, मूंगफली जैसे तेल तिलहनों के खपने की मुसीबत और बढ़ गई है। उपभोक्ताओं को भी ऊंचे अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की वजह से थोक कीमतों में आई नरमी का लाभ नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि बिनौले के नकली खल को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। आवक बढ़ने के साथ-साथ सरसों का दाम तोड़ने के लिए कुछ निहित स्वार्थी तत्व यह चर्चा भी फैलाने में लगे हैं कि अगले महीने सोयाबीन डीगम और सूरजमुखी तेल का आयात बढ़ने वाला है। इन सभी बातों को जोड़कर देखने समझने की जरुरत है।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,325-5,365 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,100-6,375 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 14,850 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,230-2,505 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,300 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,740-1,840 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,740 -1,845 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 11,200 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,900 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,650 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 9,300 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,600 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,675 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,775 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 4,655-4,675 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,455-4,495 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,075 रुपये प्रति क्विंटल।
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