देश की खबरें | मुर्मू ने विवादों के समाधान के लिए ग्राम स्तर पर मध्यस्थों को कानूनी रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया

नयी दिल्ली, तीन मई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्राम स्तर पर विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थों को कानूनी रूप से सशक्त बनाने की शनिवार को जोरदार वकालत की, ताकि ये विवाद ऊपरी अदालतों तक न पहुंचें।

मुर्मू ने यह भी कहा कि गांव में पारिवारिक या भूमि विवादों में मध्यस्थता करने वाले लोग सामाजिक रूप से सशक्त होते हैं, लेकिन उनमें कानूनी सशक्तीकरण का अभाव होता है, जिसके कारण ऐसे मामले ग्राम स्तर पर नहीं सुलझ पाते।

राष्ट्रपति मुर्मू ने यहां मध्यस्थता पर प्रथम सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि विवादों के समाधान के दौरान, प्रभावित पक्षों को पता होता है कि मध्यस्थों के पास कानूनी शक्तियों का अभाव है, इसलिए वे निर्णयों से सहमत नहीं होते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जहां ग्राम स्तर पर विवादों का समाधान वहीं हो जाए और माहौल खराब न हो तथा लोग सद्भावना से रहें।

इस कार्यक्रम में भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना, भावी प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी उपस्थित थे।

मुर्मू ने कहा कि शायद यह किसी चूक या समय की कमी के कारण हो सकता है कि गांव से लेकर उच्चतम न्यायालय तक न्यायिक व्यवस्था स्थापित नहीं हो पायी है।

उन्होंने कहा कि गांवों में मध्यस्थता की व्यवस्था पहले से ही मौजूद है, लेकिन अब लोग शिक्षित हो चुके हैं, इसलिए उन्हें पता है कि मध्यस्थों के पास कोई शक्ति नहीं है।

मेघवाल ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यस्थता केवल एक सुधार नहीं है, बल्कि एक सामूहिक जिम्मेदारी है और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "अधिक मध्यस्थता, कम मुकदमेबाजी" मुख्य मंत्र होना चाहिए।

मंत्री ने मौजूद लोगों को याद दिलाया कि रामायण में अंगद और महाभारत में भगवान कृष्ण ने मध्यस्थ की भूमिका निभायी थी और कहा कि मध्यस्थता भारतीय संस्कृति में अंतर्निहित है।

सीजेआई खन्ना ने ‘मेडिएशन एसोसिएशन आफ इंडिया’ की शुरुआत भी की, जिसके बारे में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि यह मध्यस्थता अधिनियम 2023 के तहत प्रस्तावित भारतीय मध्यस्थता परिषद के निर्माण में उत्प्रेरक के रूप में काम करेगा।

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