देश की खबरें | पिंपरी चिंचवड़ में नगर निगम अधिकारियों ने नदी किनारे बने 36 अवैध बंगले गिराये

पुणे, 17 मई महाराष्ट्र के पुणे जिले के पिंपरी चिंचवड़ उपनगर में नगर निकाय अधिकारियों ने इंद्रायणी नदी के किनारे अवैध रूप से निर्मित 36 बंगलों को शनिवार को ढहा दिया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर कार्रवाई करते हुए पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम (पीसीएमसी) के अधिकारी और कर्मचारी भारी पुलिस बल के साथ सुबह चिखली गांव में रिवर विला परियोजना स्थल पर पहुंचे।

नगर आयुक्त शेखर सिंह ने कहा कि नगर निकाय ने बंगलों को ढहा दिया गया है, क्योंकि मानसून के मौसम में ध्वस्तीकरण अभियान नहीं चलाया जा सकता।

परियोजना के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर करने वाले कार्यकर्ता तानाजी गंभीरे ने कहा कि विला का निर्माण इंद्रायणी नदी की नीली बाढ़ रेखा के किनारे किया गया है, जहां निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध है। उन्होंने बताया कि नीली रेखा 25 साल में एक बार नदी में आने वाली बाढ़ के स्तर को दर्शाती है।

जुलाई 2024 में एनजीटी ने नगर निगम को छह महीने के भीतर इन सभी 36 अवसंरचनाओं को ध्वस्त करने के लिए कहा था। हरित निकाय ने यह भी आदेश दिया था कि बंगला मालिकों से पर्यावरण क्षति मुआवजे के रूप में सामूहिक रूप से पांच करोड़ रुपये वसूले जाएं।

इसके बाद पीसीएमसी ने प्रक्रिया शुरू की और बंगला मालिकों की सुनवाई शुरू की।

इस बीच, 29 बंगला मालिकों ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन शीर्ष अदालत ने उनकी अपील खारिज कर दी।

अधिकारी ने बताया कि इसके बाद भूमि और बंगला मालिकों ने आदेश की समीक्षा के लिए एनजीटी का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, एनजीटी ने उनकी समीक्षा याचिका को भी खारिज कर दिया।

एनजीटी से कोई राहत नहीं मिलने के बाद, संपत्ति मालिकों ने फिर से उच्चतम न्यायालय का रुख किया।

शीर्ष न्यायालय ने चार मई को अपील का निपटारा किया और फैसला सुनाया कि पीसीएमसी को बंगलों को गिराने के एनजीटी के आदेश को लागू करना चाहिए और पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए पांच करोड़ रुपये वसूलने चाहिए।

पीसीएमसी आयुक्त शेखर सिंह ने ‘पीटीआई-’ को बताया कि किसी ने भ्रम पैदा करने की कोशिश की है कि शीर्ष अदालत ने चार मई को निगम को कार्रवाई करने के लिए छह महीने का समय दिया था।

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