नयी दिल्ली, 21 फरवरी तपेदिक (टीबी) के विरुद्ध एक नए एमआरएनए आधारित टीके को चूहों पर किए गए पूर्व-नैदानिक परीक्षणों में प्रभावी रूप से प्रतिरक्षा बढ़ाने वाला पाया गया है और इसके नतीजे टीके के नैदानिक परीक्षणों का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इस टीके में ‘मैसेंजर आरएनए’ (एमआरएनए) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ‘मैसेंजर आरएनए’ (एमआरएनए) प्रोटीन संश्लेषण में शामिल एकल-स्ट्रैंडेड आरएनए का एक प्रकार है।
एमआरएनए टीके सबसे पहले कोविड-19 के लिए विकसित किए गए थे।
क्षय रोग ‘माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस’ नामक बैक्टीरिया के कारण होता है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से हवा के माध्यम से फैलता है। इसके लक्षणों में लगातार खांसी, सीने में दर्द, बुखार और थकान शामिल हैं।
वर्तमान में, टीबी के खिलाफ सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला टीका बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (बीसीजी) है। इससे शरीर में टीबी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। हालांकि, टीम ने पाया कि वयस्कों में बीसीजी की प्रभावशीलता असंगत है।
‘ईबायोमेडिसिन’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि एमआरएनए टीके ने सफलतापूर्वक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सक्रिय किया, जिससे संक्रमित चूहों में टीबी की संख्या कम करने में मदद मिली।
वरिष्ठ लेखक और सिडनी संक्रामक रोग संस्थान के उप निदेशक जेमी ट्रिकस ने कहा कि ये नतीजे टीबी टीके अनुसंधान में एक बड़ी प्रगति को दर्शाते हैं तथा आगे के नैदानिक विकास के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया के लगभग आधे टीबी के मामले आठ देशों में पाए जाते हैं, जिनमें भारत, बांग्लादेश, चीन और पाकिस्तान शामिल हैं।
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