देश की खबरें | ज्यादातर अध्ययन वायरस के व्यवहार पर केंद्रित हैं, अन्य कारकों पर नहीं: स्वास्थ्य मंत्रालय ने एमआईटी अध्ययन पर कहा

नयी दिल्ली, नौ जुलाई केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के एक अध्ययन के बाद बृहस्पतिवार को कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण से संबंधित ज्यादातर अध्ययनों में ‘‘खामी’’ यह है कि वे इस बात पर केंद्रित हैं कि ‘‘विषाणु किस तरह का व्यवहार करेगा’’ और इनमें अन्य मानकों पर ध्यान नहीं दिया जाता।

एमआईटी ने हाल में अपने एक अध्ययन में कहा है कि कोविड-19 के टीके या दवा की अनुपस्थिति में भारत में 2021 में सर्दियों के अंत तक कोविड-19 के हर रोज 2.87 लाख मामले आ सकते हैं।

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मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के मॉडल अध्ययनों पर समय बेकार करने की जगह रोकथाम, निगरानी, जांच और उपचार पर ध्यान देने से बेहतर परिणाम आएंगे।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में विशेष दायित्व अधिकारी राजेश भूषण ने संबंधित अध्ययन पर सवाल उठाते हुए कहा कि गणितीय मॉडल सिर्फ इस बात पर ध्यान देते हैं कि ‘‘वायरस या संक्रमण कैसे व्यवहार करेगा’’ और इनमें अन्य कारकों पर ध्यान नहीं दिया जाता।

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उन्होंने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘‘हम सब जानते हैं कि पिछले कुछ महीनों में विभिन्न संगठनों ने गणितीय मॉडलों की मदद से बीमारी के मामलों की संख्या और स्थिति का पूर्वानुमान जताने की कोशिश की है। लेकिन हमारा मानना है कि इस तरह के प्रयासों में कई अन्य मानकों को संज्ञान में नहीं लिया जाता।’’

अधिकारी ने कहा, ‘‘एक मानक यह है कि वायरस या संक्रमण कैसा व्यवहार करेगा, दूसरा मानक यह है कि सरकारें संक्रमण को लेकर किस तरह की कार्रवाई करेंगी तथा एक अन्य मानक यह है कि समुदाय किस तरह का व्यवहार करेगा।’’

उन्होंने कहा कि लगभग सभी गणितीय मॉडलों में वायरस या संक्रमण के व्यवहार के पहले मानक पर ध्यान दिया जाता है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘अधिकतर गणितीय मॉडल केवल पहले मानक (वायरस या संक्रमण किस तरह का वयवहार करेगा) पर ध्यान देते हैं और फिर भी हम निश्चित तौर पर नहीं कह सकते कि वायरस विभिन्न परिस्थितियों (उदाहरण के लिए: घनी या बिखरी आबादी में) किस तरह व्यवहार करेगा।’’

भूषण ने कहा, ‘‘इसलिए हमारा मानना है कि इन मॉडलों पर समय बेकार करने की जगह हम रोकथाम, निगरानी, जांच और उपचार पर ध्यान दें, जिससे हमें बेहतर परिणाम मिलेंगे।’’

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