25 मार्च की बड़ी खबरें और अपडेट्स
भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं.
भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.- ईरान युद्ध खत्म करने के लिए ट्रंप का 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव
- लातविया और एस्टोनिया में घुसकर क्रैश हुए ड्रोन
- ईरान युद्ध के कारण मार्च में आधा हो सकता है भारत का एलपीजी आयात
- जर्मन राष्ट्रपति ने ईरान युद्ध को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
- अभी यूरोपीय एकता शीर्ष प्राथमिकता: जर्मन विदेश मंत्री
- 16,600 करोड़ रुपये में बिकेगी आरसीबी, कौन होंगे नए मालिक?
हमारे रिजर्व का 80 फीसदी हिस्सा बचा है, जरूरत पड़ी तो और तेल देंगे: आईईए
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के प्रमुख फातिह बिरोल ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ती है, तो वह अपने रिजर्व से और तेल निकालने के लिए तैयार हैं. उन्होंने यह एलान जापान की राजधानी टोक्यो में किया. इससे पहले, जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने आईईए से अपील की थी कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध और खिंचता है, तो एजेंसी सुरक्षित तेल भंडार से और मात्रा जारी करने के लिए तैयार रहे.
ईरान युद्ध के कारण उपजे ऊर्जा संकट को देखते हुए इसी महीने आईईए ने अपने रिजर्व से 40 करोड़ बैरल तेल निकालने का फैसला किया था. मध्यपूर्व में जारी जंग के कारण ऊर्जा संकट का असर घटाने के लिए सदस्य देशों ने यह कदम उठाया है. यह अब तक का सबसे बड़ा रिलीज था. फातिह बिरोल ने आश्वासन के स्वर में कहा कि भंडार में अब भी खासा तेल है, "हमारे भंडार का 80 फीसदी हिस्सा अब भी हमारे पास है. 40 करोड़ बैरल, हमारे भंडार का केवल 20 प्रतिशत हिस्सा ही था."
ईरान युद्ध से भारत‑चीन‑यूरोप पर तगड़ा असर, रूस को फायदा
बिरोल ने आगे कहा, "अगर और जब भी जरूरी हो, हम आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं. मगर, मैं उम्मीद करता हूं कि इसकी जरूरत ना पड़े." उन्होंने आगाह करते हुए कहा, "दुनिया बहुत गंभीर ऊर्जा खतरे का सामना कर रही है, "लेकिन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का अभिभावक होने की अपनी केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए तैयार है."
लातविया और एस्टोनिया में घुसे रूस से आए ड्रोन, यूक्रेन युद्ध से हो सकता है संबंध
दो बाल्टिक देशों, लातविया और एस्टोनिया ने बताया है कि रूस की दिशा से आए ड्रोन उनके भूभाग में दाखिल हुए. लातविया की सेना ने बताया कि 25 मार्च को उनके हवाई इलाके में दो ड्रोन घुसे. प्रशासन के मुताबिक, एक ड्रोन रुस और दूसरा बेलारूस की दिशा से आया था. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, ड्रोन क्रासलवा जिले में सीमा के पास क्रैश हो गया. यह इलाका रूस और बेलारूस की सीमा के पास है.
नाटो एयरस्पेस: क्या बाल्टिक देशों के स्टार्टअप रूस के ड्रोन का मुकाबला कर सकते हैं?
एस्टोनिया की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी ने भी पब्लिक ब्रॉडकास्टर ईआरआर को जानकारी दी कि इसी सुबह रूस से आया एक ड्रोन उनके हवाई क्षेत्र में घुसा और एक स्थानीय बिजलीघर की चिमनी में जा टकराया. इस घटना में किसी के घायल होने या बिजलीघर को नुकसान पहुंचने की खबर नहीं है. हालांकि, ये ड्रोन कहां से रवाना हुए थे इसकी अभी पुष्टि नहीं हो सकी है.
रूसी ड्रोन हमलों का मुकाबला कैसे कर सकते हैं पोलैंड, यूक्रेन, और नाटो
एस्टोनिया के अधिकारियों ने संभावना जताई है कि यह सीधे एस्टोनिया को निशाना बनाने की जगह, रूस-यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई का नतीजा हो सकता है. 'लिथुआनियन नेशनल रेडियो एंड टेलिविजन' ने भी एस्टोनिया के प्रॉसिक्यूटर जनरल के हवाले से बताया कि उपलब्ध जानकारियां संकेत देती हैं कि ड्रोन जानबूझकर एस्टोनिया नहीं भेजा गया था. इस घटना की समीक्षा के लिए 25 मार्च को एस्टोनिया की सरकार एक बैठक कर रही है.
जर्मनी के बुनियादी ढांचे पर लगातार कौन कर रहा है हमला
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ये घटनाएं तकरीबन उसी समय हुईं जब यूक्रेनी ड्रोन हमले के कारण रूस के बाल्टिक सागर के बंदरगाह ऊस्ट-लूगा में एक तेल संयंत्र में आग लगी. यह पेट्रोलियम निर्यात का एक बड़ा केंद्र है और एस्टोनिया से लगी सीमा से करीब 25 किलोमीटर दूर है.
ईरान युद्ध के कारण मार्च में आधा हो सकता है भारत का एलपीजी आयात
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होरमुज स्ट्रेट के बंद होने के चलते मार्च में भारत का एलपीजी आयात लगभग आधा हो सकता है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने कारोबारियों और शिप-ट्रैकिंग डेटा के आधार पर यह जानकारी दी है. खबर के मुताबिक, भारत इस महीने 11.90 लाख मीट्रिक टन एलपीजी आयात करता दिख रहा है, जो फरवरी के मुकाबले करीब 46 फीसदी कम है.
भारत अपनी जरूरत की 60 फीसदी एलपीजी आयात से हासिल करता है. ईरान पर अमेरिका और इस्राएल के हमले से पहले, भारत में जलमार्ग से आने वाली 90 फीसदी एलपीजी खाड़ी देशों से आती थी. लेकिन युद्ध के कारण मार्च में यह 55 फीसदी पर पहुंच गई है. अब भारत को एलपीजी का 40 फीसदी आयात अमेरिका, रूस और अर्जेंटीन आदि देशों से प्राप्त हो रहा है.
भारत अब नॉर्वे और कनाडा से भी एलपीजी खरीदने की कोशिश कर रहा है. इसके अलावा, घरेलू रिफाइनरियों को भी उत्पादन बढ़ाने और घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है. भारत ने घरेलू उपभोक्ताओं से जहां भी संभव हो, वहां एलपीजी से पीएनजी गैस पर शिफ्ट होने की अपील भी की है.
जर्मन विदेश मंत्री वाडेफुल ने कहा, यूरोपीय एकता सबसे बड़ी प्राथमिकता
जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा है कि यूरोपीय एकता फिलहाल यूरोप की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर होनी चाहिए. वाडेफुल ने कहा कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिकी विदेश नीति में हुए गंभीर बदलावों के चलते यह जरूरी है. उन्होंने 24 मार्च को बर्लिन में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही.
अधिकांश जर्मन मतदाता ईरान युद्ध के खिलाफ; डर का माहौल
यूरोप की सुरक्षा चिंताओं को रेखांकित करते हुए वाडेफुल ने कहा, "हमारे ट्रांस-अटलांटिक संबंध बहुत गंभीर बदलावों से गुजर रहे हैं. चूंकि यूरोप में सुरक्षा पिछले 75 साल की तुलना में सबसे ठोस खतरे में हो सकती है, इसलिए यूरोपीय एकता हमारी शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए."
जर्मन लोगों की नजर में अब अमेरिका "विश्व शांति के लिए खतरा"
वाडेफुल ने यह भी याद दिलाया कि लोगों को कभी नहीं भूलना चाहिए कि वो संयुक्त राज्य अमेरिका ही था, जिसने जर्मनी को नाजी सत्ता से मुक्ति दिलाई. एक नए गणतंत्र के तौर पर जर्मनी को आकार दिया और जर्मनी के दोनों हिस्सों को फिर एक करना संभव बनाया. इस कार्यक्रम में जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रांक-वाल्टर श्टाइनमायर भी उपस्थित थे. अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने ईरान पर हमले को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया.
16,600 करोड़ रुपये में बिकेगी आरसीबी, जानिए कौन होंगे नए मालिक
आदित्य बिरला समूह, टाइम्स ऑफ इंडिया समूह, बोल्ट वेंचर्स और ब्लैकस्टोन ने 24 मार्च को बताया कि वे इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु फ्रेंचाइजी को 16,600 करोड़ रुपये में खरीदने जा रहे हैं. इस समझौते के तहत, आरसीबी की महिला और पुरुष दोनों टीमें नए खरीदारों के पास चली जाएंगी. आरसीबी की पुरुष टीम ने 2025 में और महिला टीम ने 2024 में आईपीएल का खिताब जीता था.
आरसीबी का मालिकाना हक अभी यूनाइटेड स्पिरिट्स के पास है, जो शराब बेचने वाली दिग्गज कंपनी डियाजियो की भारतीय इकाई है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, साल 2008 में आईपीएल शुरू होने से पहले यूनाइडेट स्पिरिट्स ने 485 करोड़ रुपये की बोली लगाकर आरसीबी को खरीदा था. पिछले साल कंपनी ने फ्रेंचाइजी में अपनी हिस्सेदारी की रणनीतिक समीक्षा करने के बाद इसे बेचने का फैसला लिया.
सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के अदार पूनावाला, मणिपाल हॉस्पिटल्स के रंजन पई और प्राइवेट इक्विटी फर्म ईक्यूटी और टीपीजे ने भी आरसीबी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी. मगर, बाजी आदित्य बिरला और टाइम्स ऑफ इंडिया समूह के हाथ लगी. यह अधिग्रहण भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की अनुमति के बाद ही पूरा हो पाएगा.
जर्मन राष्ट्रपति ने ईरान युद्ध को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन, ईरानी विदेश मंत्री ने सराहा
जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रांक-वाल्टर श्टाइनमायर ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इस्राएल के युद्ध की तीखी आलोचना की है. इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए राष्ट्रपति श्टाइनमायर ने कहा कि जर्मनी के पास डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन का समर्थन करने की "कोई वजह" नहीं है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद विदेश विभाग की फिर से शुरुआत होने की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने यह बात कही.
ईरान युद्ध से पूरी दुनिया में पैदा हो सकता है खाद्य संकट
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष "राजनीतिक रूप से एक विनाशकारी गलती" है और "अगर इसका मकसद सच में ईरान को एटम बम के रास्ते पर बढ़ने से रोकना था" तो "निश्चित ही यह एक टालने लायक, गैर जरूरी युद्ध" है. 2015 में ईरान के साथ हुई न्यूक्लियर डील में जर्मनी भी एक पार्टी था. उस समय श्टाइनमायर बतौर विदेश मंत्री समझौते की प्रक्रिया में शामिल थे.
ईरान और इस्राएल-अमेरिका युद्ध पर कहां खड़े हैं ब्रिक्स देश
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने राष्ट्रपति श्टाइनमायर द्वारा की गई इस आलोचना की प्रशंसा की. सोशल मीडिया पोस्ट में इसका जिक्र करते हुए अरागची ने लिखा, "जो कानून के शासन को महत्व देते हैं, उन्हें आवाज भी उठानी चाहिए." अरागची ने जोर दिया कि "असलियत में अंतरराष्ट्रीय कानून मर चुका है." उन्होंने आरोप लगाया कि "गाजा बनाम यूक्रेन पर पश्चिमी देशों के दोहरे मापदंड और ईरान पर इस्राएल-अमेरिका के आक्रमण पर चुप्पी" ने इसे शह दी है.
जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की सीडीयू पार्टी के सांसद, येंस श्पान ने राष्ट्रपति के बयान की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी युद्ध की कानूनी वैधता के अपने मूल्यांकन में श्टाइनमायर को संयम बरतना चाहिए. श्पान ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आकलन करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है और मैं जर्मन गणतंत्र के अधिकारियों और गणमान्य लोगों से उम्मीद करता हूं कि वे इस मूल्यांकन का परिणाम आने की प्रतीक्षा करें और इसका सम्मान करें." येंस श्पान बुंडेसटाग यानी जर्मन संसद के निचले सदन में सीडीयू की संसदीय समिति के लीडर भी हैं.
जंग खत्म करने के लिए ट्रंप का युद्धविराम प्रस्ताव, पाकिस्तान बनना चाहता है मेजबान
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को रोकने के लिए डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 15 सूत्रीय युद्धविराम योजना सौंपी है. पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए यह योजना ईरान को दी गई है. एक सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर न्यूज एजेंसी एपी के साथ यह जानकारी साझा की है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने भी अपने सूत्र का नाम जाहिर किए बिना बताया है कि वॉशिंगटन ने युद्ध समाप्त करने के लिए 15 सूत्रीय योजना तेहरान को भेजी है.
अमेरिका के इस प्रस्ताव पर ईरानी सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि अमेरिका खुद से बातचीत कर रहा है. ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फकारी ने कहा, "क्या आपका आंतरिक संघर्ष इस स्तर पर पहुंच गया है कि आप खुद से बातचीत कर रहे हैं." उन्होंने आगे कहा, "हमारे जैसे लोग कभी भी आपके जैसे लोगों के साथ नहीं जा सकते."
इस बीच मंगलवार, 24 मार्च को पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश की है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "जारी संघर्ष के व्यापक समाधान के लिए पाकिस्तान सार्थक और निर्णायक बातचीत की मेजबानी करने के लिए तैयार है." उन्होंने यह भी लिखा कि ऐसा ईरान और अमेरिका की सहमति मिलने के बाद ही होगा.
ईरान बातचीत के इन प्रस्तावों को संदेह से देख रहा है, क्योंकि अमेरिका अभी भी मध्यपूर्व में और सैनिक भेज रहा है. इससे पहले दो बार उच्च-स्तरीय वार्ता के दौरान ही ईरान पर हमले हो चुके हैं. 28 फरवरी को मौजूदा संघर्ष की शुरुआत के दौरान भी ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हो रही थी. फिलहाल, ईरान ने किसी भी बातचीत का हिस्सा होने से इनकार किया है.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 25, 2026 05:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

