पुणे (महाराष्ट्र), एक सितंबर उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति अभय ओका ने रविवार को कहा कि नेताओं द्वारा कुछ घटनाओं का फायदा उठाए जाने और दोषियों के लिए मृत्युदंड का आश्वासन दिए जाने के कारण ‘‘भीड़तंत्र’’ स्थापित हो रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल न्यायपालिका ही कानूनी फैसले दे सकती है।
पुणे में महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति ओका ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने और शीघ्र न्यायपूर्ण निर्णय देने के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में जमानत देने को लेकर न्यायपालिका की अकारण आलोचना की जाती है। न्यायमूर्ति ओका ने संविधान के पालन को सुनिश्चित करने में वकीलों और न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित किया।
न्यायमूर्ति ओका ने कहा, ‘‘यदि न्यायपालिका का सम्मान किया जाना है तो इसकी स्वतंत्रता बरकरार रहनी चाहिए। संविधान का पालन तभी होगा जब वकील और न्यायपालिका संवेदनशील रहेंगे। न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने में वकीलों की प्रमुख भूमिका होती है और उन्हें यह जिम्मेदारी निभानी चाहिए, अन्यथा लोकतंत्र नहीं बचेगा।’’
उन्होंने सार्वजनिक विमर्श की मौजूदा दिशा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एक ‘‘भीड़तंत्र’’ बनाया जा रहा है, जिसमें नेता कुछ घटनाओं का लाभ उठाते हैं और लोगों को दोषियों के लिए मृत्युदंड का आश्वासन देते हैं, जबकि कानूनी फैसले देने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है।
न्यायमूर्ति ओका ने कहा, ‘‘हमने भीड़तंत्र बना दिया है। जब कोई घटना होती है, तो राजनीतिक लोग इसका फायदा उठाते हैं। नेता उस विशेष स्थान पर जाते हैं और लोगों को आश्वासन देते हैं कि आरोपी को मौत की सजा दी जाएगी, लेकिन निर्णय लेने का अधिकार न्यायपालिका के पास है।’’
उन्होंने किसी विशेष घटना का जिक्र नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी कोलकाता में बलात्कार और हत्या की घटना तथा महाराष्ट्र के बदलापुर में एक स्कूल में दो बच्चियों के कथित यौन शोषण की पृष्ठभूमि में आई, जहां दोषियों को सख्त सजा देने की मांग उठी है।
न्यायमूर्ति ओका ने कहा कि कुछ मामलों में जमानत दिए जाने पर न्यायपालिका पर ‘‘बिना किसी कारण के आलोचनाओं की बौछार’’ हो जाती है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों को कानून के अनुसार निर्णय देना चाहिए जो पारदर्शी होना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने शनिवार को कोलकाता में एक डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या में शामिल लोगों के लिए मृत्युदंड की मांग की। कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बलात्कार के दोषियों को मृत्युदंड सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन का वादा किया था।
बार काउंसिल के कार्यक्रम में उपस्थित उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रसन्न भालचंद्र वराले ने शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
न्यायमूर्ति वराले ने कहा, ‘‘अपने मूल्यों को बनाए रखना और कड़ी मेहनत करना सफलता की कुंजी है। संविधान को जानना या पढ़ना न केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि हमें इसके बारे में जागरूक भी होना चाहिए। महिलाओं पर हमलों को देखते हुए, न केवल बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की जरूरत है, बल्कि अब बेटा पढ़ाओ भी महत्वपूर्ण है।’’ उन्होंने लड़कियों और महिलाओं के प्रति लड़कों को संवेदनशील बनाने की आवश्यकता बताई।
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