आइजोल, 10 मार्च मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने सोमवार को कहा कि उनकी सरकार सुरक्षा चिंताओं के बीच राज्य में संरक्षित क्षेत्र परमिट (पीएपी) को फिर से लागू करने और भारत-म्यांमा सीमा पर आवाजाही को विनियमित करने के केंद्र के फैसले का विरोध नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा कि म्यांमा जाने वाले विदेशियों द्वारा मिजोरम को गुप्त रूप से पारगमन मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो केंद्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
राज्य विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान लालदुहोमा ने कहा कि पिछले वर्ष जून से दिसंबर के बीच लगभग 2,000 विदेशी मिजोरम आए और उनमें से कई पर्यटक के रूप में नहीं आए थे और राज्य से बिना किसी की जानकारी के चले गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी लोग भारत-म्यांमा सीमा पार कर पड़ोसी देश के चिन हिल्स में सैन्य प्रशिक्षण देने के लिए घुस आए हैं।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा, "वर्तमान भू-राजनीति में, हमारे पड़ोसी देश की स्थिति पर चीन और अमेरिका सहित विभिन्न देशों की गहरी नजर है। ऐसी स्थिति में, विदेशियों द्वारा पारगमन मार्ग के रूप में मिजोरम का उपयोग किए जाने की स्थिति केंद्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है, जिसके कारण राज्य में संरक्षित क्षेत्र परमिट को फिर से लागू करना पड़ा।"
उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में भी संरक्षित क्षेत्र परमिट पुनः लागू कर दिया गया है, जिसका उपयोग म्यांमा की यात्रा करने वाले विदेशियों द्वारा पारगमन मार्ग के रूप में किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मिजोरम सरकार ने शुरू में इस निर्णय का विरोध किया था, लेकिन बाद में उसे केंद्र के दृष्टिकोण से परमिट की अनिवार्यता समझ में आ गई।
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