इंफाल, 14 फरवरी ‘द कोओर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी’ (कोकोमी) ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने को शुक्रवार को “अलोकतांत्रिक” और “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया।
कोकोमी में इंफाल स्थित कई नागरिक समाज संगठन शामिल हैं।
मेइती संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रपति शासन "राज्य को और अधिक अशांति की ओर धकेलने की एक चाल है।”
कोकोमी ने एक बयान में आरोप लगाया, “ मणिपुर में भाजपा के पास पूर्ण बहुमत होने के बावजूद भारत सरकार द्वारा अचानक और अनुचित तरीके से राष्ट्रपति शासन लागू करना, मणिपुर को और अधिक अशांति की ओर धकेलने की एक सुनियोजित चाल के रूप में देखा जा रहा है।“
इंफाल स्थित संगठन ने यह भी दावा किया, "यह कदम केंद्र सरकार की वास्तविक मंशा पर गंभीर सवाल उठाता है, क्योंकि इसने वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय अपने ही भाजपा विधायकों की कथित अक्षमता पर दोष मढ़ दिया है।”
कोकोमी ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य विधानसभा के महत्वपूर्ण सत्र से ठीक पहले, लोगों को कोई उचित स्पष्टीकरण दिए बिना, मुख्यमंत्री का "जबरन" इस्तीफा "लोकतांत्रिक सिद्धांतों के साथ सरासर विश्वासघात" है।
इसने दावा किया, “ सत्ता (पक्ष) का यह दांव मणिपुर, खास तौर पर मेतई समुदाय को सीधे सैन्य नियंत्रण में रखने के एजेंडे को दर्शाता है। यह फैसला कुकी उग्रवादियों और अलगाववादी समूहों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के साथ आसानी से मेल खाता है, जो मणिपुर में अफस्पा और राष्ट्रपति शासन लागू करने की वकालत करते रहे हैं।”
मणिपुर में बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया तथा एन. बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद बृहस्पतिवार शाम को विधानसभा को निलंबित कर दिया गया, जिससे राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता पैदा हो गई। मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है।
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