नयी दिल्ली, 26 अप्रैल आम आदमी पार्टी (आप) की शैली ओबेरॉय बुधवार को निर्विरोध दिल्ली की महापौर चुन ली गईं, क्योंकि चुनाव में उन्हें टक्कर दे रहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार शिखा राय ने अपना नामांकन वापस ले लिया।
इस तरह, ओबेरॉय को दिल्ली के महापौर पद का एक और कार्यकाल मिल गया।
आप ने दावा किया कि भाजपा की नगर इकाई ने चुनाव में आत्मसमर्पण कर अपनी पूरी पार्टी को “अपमानित” किया।
विधायक और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के पार्टी प्रभारी दुर्गेश पाठक ने दावा किया कि भाजपा और उसके पार्षदों ने “(अरविंद) केजरीवाल की आप के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया” और पार्टी को “वॉकओवर” दे दिया।
दिल्ली भाजपा ने हालांकि कहा कि उसने नामांकन वापस लेने का फैसला किया है क्योंकि “हमारे सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद, आप स्थायी समिति और वार्ड समितियों के गठन की अनुमति देकर एमसीडी को कार्यात्मक बनाने के लिए तैयार नहीं है”।
मौजूदा उप-महापौर आले मोहम्मद इकबाल भी एक बार फिर इस पद के लिए चुन लिए गए, क्योंकि भाजपा उम्मीदवार सोनी पाल ने अपना नामांकन वापस ले लिया।
एमसीडी में सत्ताधारी पार्टी आप ने दावा किया कि भाजपा उम्मीदवारों - राय और पाल ने “मतदान से कुछ मिनट पहले, हार के डर से” अपना नामांकन वापस ले लिया।
दिल्ली में महापौर पद के चुनावों में ओबेरॉय और राय के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना थी, लेकिन भाजपा उम्मीदवारों के नाम वापस लेने से सदन की कार्यवाही कुछ ही देर में संपन्न हो गई।
आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, “शैली और आले को फिर से क्रमश: महापौर और उप महापौर बनने पर बधाई, इस बार निर्विरोध चुने गये। दोनों को शुभकामनाएं। लोगों को हमसे बहुत उम्मीदें हैं।’’
सदन की कार्यवाही समाप्त होने के बाद एमसीडी के मुख्यालय सिविक सेंटर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पाठक ने दावा किया कि भाजपा और उसके पार्षदों ने ‘‘केजरीवाल की आप के सामने आत्मसमर्पण कर दिया’’।
पाठक ने सिविक सेंटर में संवाददाता सम्मेलन के दौरान यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने आप पार्षदों को पार्टी से बाहर निकालने के लिए कुछ वरिष्ठ अधिकारियों समेत दिल्ली पुलिस से मदद मांगी थी।
दिल्ली पुलिस की तरफ से इसपर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई लेकिन दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने पलटवार करते हुए कहा कि पाठक सबसे ‘‘गैरजिम्मेदार नेताओं’’ में से एक हैं, और पिछले चार वर्षों में, ‘‘हमने उन्हें सिर्फ अपने राजनीतिक स्वामी को खुश करने के लिए बोलते देखा है।’’
सिविक सेंटर में मीडिया से बात करते हुए महापौर ओबेरॉय ने कहा, ‘‘हम अरविंद केजरीवाल, सभी पार्षदों और दिल्ली की जनता को धन्यवाद देना चाहते हैं। हम दिल्ली की जनता से किए गए वादों को पूरा करेंगे। मैं वादा करती हूं कि मैं सभी अच्छे काम करना जारी रखूंगी और हम पार्कों, सड़कों और स्कूलों से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए ईमानदारी से काम करेंगे।’’
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि निगम के सदन की अगली बैठक दो मई को आयोजित होगी।
ओबेरॉय को इससे पहले 22 फरवरी को चौथी कोशिश में महापौर चुना गया था, क्योंकि मनोनीत सदस्यों को मतदान का अधिकार देने के मुद्दे पर जारी गतिरोध के चलते चुनाव कराने के पिछले तीन प्रयास नाकाम हो गए थे।
राष्ट्रीय राजधानी में महापौर पद का पांच साल का कार्यकाल एक-एक वर्ष के पांच कार्यकाल का होता है, जिसमें से पहला वर्ष महिलाओं के लिए, दूसरा वर्ष अनारक्षित श्रेणी के लिए, तीसरा वर्ष आरक्षित श्रेणी के लिए और बाकी के दोनों वर्ष अनारक्षित श्रेणी के लिए आरक्षित होते हैं।
शहर को हर वित्त वर्ष की समाप्ति के बाद एक नया महापौर मिलता है।
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