नयी दिल्ली, 11 सितंबर पिछले दस महीनों में कच्चे तेल का दाम पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल से अधिक होने के बावजूद घरेलू पेट्रोलियम रिफाइनिंग कंपनियां चालू वित्त वर्ष में नौ-दस डॉलर प्रति बैरल का मार्जिन कमा सकती हैं। एक रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई है।
केयरएज रेटिंग्स की सोमवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से अधिक होने के साथ ही रूसी कच्चे तेल 'यूराल' और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच फासला बढ़ गया है। बड़े पैमाने पर रूसी तेल पर निर्भर भारतीय तेल कंपनियां इसे 60 डॉलर प्रति बैरल के भीतर ही खरीद सकती हैं। जी-7 समूह ने रूसी तेल के लिए यह मूल्य दायरा तय किया हुआ है।
रिपोर्ट कहती है कि रूसी तेल 60 डॉलर प्रति बैरल की सीमा से कम भाव पर ही बिकता रहा है लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में कच्चे तेल के दाम में उछाल आने से अब यह 69 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। इस वजह से भारत के कुल कच्चा तेल उपभोग में रूसी तेल की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से घटकर 34 प्रतिशत पर आ गई है।
रूस और सऊदी अरब ने कच्चे तेल के उत्पादन में 10 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती का फैसला दिसंबर तक बढ़ाने की हाल ही में घोषणा की है। इस स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना बहुत कम दिख रही है।
केयरएज ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "इस पृष्ठभूमि में भी रूस के सस्ते तेल से बड़े पैमाने पर लाभांवित होती रहीं भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां वित्त वर्ष 2023-24 में नौ-दस डॉलर प्रति बैरल का रिफाइनिंग मार्जिन कमा सकती हैं। इसकी वजह यह है कि रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति कम होने पर भी उस तेल के शोधन पर इन कंपनियों का मार्जिन अच्छा रहेगा।"
प्रेम
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY