नोएडा, चार अगस्त नोएडा प्राधिकरण कई खामियों के सामने आने के बादअपने निर्माणाधीन कार्यालय परिसर की संरचनात्मक स्थिरता की जांच दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी दिल्ली) से कराएगा। एक बयान में यह जानकारी दी गई है।
नोएडा प्राधिकरण के नये सीईओ द्वारा कई खामियां पाए जाने के बाद प्राधिकारण ने कहा कि आईआईटी की रिपोर्ट मिलने के बाद ही वहां कर्मियों को भेजा जाएगा।
नोएडा प्राधिकरण की नई इमारत नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे से लगे सेक्टर 96 में स्थित है। लंबे समय से विलंबित यह परियोजना मई 2016 में 367 करोड़ रुपये के स्वीकृत बजट के साथ शुरू हुई थी और शुरुआत में इसके जनवरी 2019 तक पूरा होने की उम्मीद थी।
हालांकि कार्य में विलंब को देखते हुए काम पूरा करने की समय सीमा जनवरी 2024 तक बढ़ा दी गई, जबकि इस साल अप्रैल तक इस पर 131.76 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
पिछले महीने रितु माहेश्वरी से कार्यभार संभालने वाले नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम. ने दो अगस्त को प्राधिकरण के कार्यालय के लिए निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण किया।
बयान में प्राधिकरण ने कहा, ‘‘सीईओ ने पाया कि इमारत के संरचनात्मक विकास में कई खामियां हैं, जैसे इमारत की फिनिशिंग, खंभों की स्थिति, डिजाइन और संरचनात्मक स्थिरता आम तौर पर सही नहीं है, इन सभी में बहुत सुधार की आवश्यकता है और कुछ स्थानों पर पूर्ण परिवर्तन की जरूरत है।’’
बयान में कहा गया है, “सीईओ ने तुरंत अधिकारियों को आईआईटी दिल्ली को एक पत्र लिखने और उल्लिखित परिवर्तनों के अनुसार इस इमारत का निरीक्षण करने के बाद संरचनात्मक स्थिरता रिपोर्ट देने को कहा।”
एक अधिकारी ने कहा कि ठेकेदार प्रतिभा इंडस्ट्रीज को पांच जनवरी, 2016 को नये भवन के निर्माण का काम सौंपा गया था, लेकिन असंतोषजनक काम और 451 दिनों की बेहद लंबी देरी के कारण इसे काली सूची में डाल दिया गया था।
उन्होंने कहा कि इसके बाद परियोजना के लिए एक नया टेंडर जारी किया गया और एसटी कंस्ट्रक्शन को इसकी जिम्मेदारी दी गई।
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