देश की खबरें | मणिपुर हिंसा : नागरिक संस्थाओं ने प्रधानमंत्री से अदालती निगरानी में अधिकरण गठित करने का अनुरोध किया

नयी दिल्ली, 16 जून मणिपुर में जारी जातीय हिंसा की पृष्ठभूमि में कई नागरिक संस्थाओं ने राज्य में हालात सामान्य करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अदालत की निगरानी में अधिकरण का गठन करने और प्रभावित लोगों को वित्तीय मुआवजा देने की मांग की है।

उधर, दिल्ली में रहने वाले कुकी-जो समुदाय के एक सदस्य ने मणिपुर की जेलों में बंद कुकी-जो कैदियों की सुरक्षा को लेकर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है और उनसे हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।

शाह को लिखे पत्र में जॉर्ज टी. हाओकिप ने दावा किया है, ‘‘मणिपुर की जेल में बंद कैदियों को प्रताड़ित किए जाने, उनके साथ अमानवीय व्यवहार और उनके जीवन को खतरा होने जैसी परेशान करने वाली खबरें आ रही हैं।’’

उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से अनुरोध किया है, ‘‘मामले की गंभीरता और न्याय तथा मानवाधिकार के मौलिक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए, मैं (मणिपुर के) चुड़ाचन्द्रपुर जेल में बंद कुकी-जो समुदाय के कैदियों को तत्काल रिहा करने या ऐसी जगह स्थानांतरित करने में आपसे हस्तक्षेप का अनुरोध करता हूं, जहां उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।’’

राज्यसभा के सदस्य मनोज कुमार झा, पूर्व नौकरशाह मीना गुप्ता, कार्यकर्ताओं कविता कृष्णन और बृंदा आदिगे तथा नागरिक संस्थाओं ने एक बयान में कहा कि ‘‘प्रधानमंत्री को मणिपुर की वर्तमान स्थिति की जवाबदेही लेनी चाहिए।’’

बयान के अनुसार, उन्होंने मणिपुर में हिंसा तत्काल बंद करने का अह्वान किया है। हिंसा के कारण ‘‘बड़े पैमाने पर जीवन, आजीविका और संपत्ति की हानि हो रही है।’’

पांच सौ से ज्यादा समूहों द्वारा हस्ताक्षरित इस बयान के अनुसार, ‘‘हजारों लोगों के शरणार्थी शिविरों में रहने, लाखों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के विस्थापित होने की सूचना है और हिंसा अभी जारी है।’’

बयान में कहा गया है, ‘‘प्रधानमंत्री को मणिपुर की मौजूदा स्थिति की जवाबदेही लेनी चाहिए। तथ्यों की पुष्टि करने और न्याय की जमीन तैयार करने और मणिपुर में समुदायों को बांटने वाले घावों को भरने के लिए अदालत की निगरानी में अधिकरण का गठन किया जाना चाहिए।’’

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