देश की खबरें | मालेगांव विस्फोट: पुरोहित ने मामला निरस्त करने के लिए उच्च न्यायालय में दायर की याचिका
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

मुंबई, चार सितंबर मालेगांव में 2008 में हुए विस्फोट के मामले के आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित ने बंबई उच्च न्यायालय में ताजा याचिका दायर कर अपने खिलाफ लगे आरोपों को निरस्त करने का आग्रह किया है।

उनके वकील एवं पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने शुक्रवार को अदालत से कहा कि पुरोहित सेना के खुफिया अधिकारी के रूप में काम कर रहे थे और उन्हें ‘‘फंसा’’ दिया गया।

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याचिका में यह भी कहा गया कि पुरोहित सेवारत सैन्य अधिकारी थे, लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उन पर मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत पूर्व अनुमति नहीं ली।

न्यायमूर्ति एस एस शिन्दे और न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक की खंडपीठ के समक्ष रोहतगी ने कहा कि पुरोहित सेना की खुफिया इकाई में काम कर रहे थे। वह 2008 के मालेगांव विस्फोट से पहले खुफिया अधिकारी के रूप में ‘‘अपना दायित्व निभाते हुए’’ साजिश रचने संबंधी बैठकों में शामिल हुए।

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उन्होंने दलील दी कि इसलिए एनआईए को पुरोहित पर मुकदमा चलाने के लिए सीआरपीसी की धारा 197 के तहत पूर्व अनुमति लेनी चाहिए थी। लोकसेवक पर मुकदमा चलाने के लिए धारा 197 के तहत सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता होती है।

रोहतगी ने दलील दी कि सेना ने उच्चतम न्यायालय से जमानत मिलने के बाद 2017 में पुरोहित को नौकरी पर बहाल कर दिया था। शीर्ष अदालत ने अपने जमानत आदेश में रेखांकित किया था कि पुरोहित ने अपना दायित्व निभाने के रूप में साजिश संबंधी बैठकों में हिस्सा लिया।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘‘उनका (पुरोहित) काम धार्मिक चरमपंथियों की बैठकों में घुसने और फिर उसकी खबर सेना को देने का था। उन्हें मामले में फंसा दिया गया और उन्होंने उच्चतम न्यायालय से जमानत मिलने तक आठ साल जेल में गुजारे।’’

एनआई ने अपने हलफनामे में पुरोहित की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि साजिश संबंधी बैठकों में शामिल होते समय पुरोहित सेना के लिए काम नहीं कर रहे थे, इसलिए मुकदमे के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं थी।

एनआईए ने कहा कि निचली अदालत और उच्च न्यायालय ने पूर्व में आरोपमुक्त करने का आग्रह करने वाली पुरोहित की याचिका को खारिज कर दिया था। इसी तरह की राहत मांगने वाली एक और अपील उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है, इसलिए वह ताजा याचिका दायर नहीं कर सकते।

उच्च न्यायालय ने पुरोहित के वकीलों को एनआईए के हलफनामे का जवाब देने के लिए समय प्रदान करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख निर्धारित की।

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