देश की खबरें | मेजर ढोचक को उनके पैतृक गांव में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

चंडीगढ़/पानीपत, 15 सितंबर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए अपने प्राणों की आहूति देने वाले शहीद मेजर आशीष ढोचक को पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ पानीपत के उनके पैतृक गांव में हजारों लोगों ने नम आंखों के साथ अंतिम विदाई दी। शहीद मेजर ढोचक की अंतिम यात्रा में उनके शोक संतप्त परिवार के साथ-साथ सेना के अधिकारी भी मौजूद थे।

शहीद मेजर ढोचक के पार्थिव शरीर को शुक्रवार सुबह पानीपत में उनके घर लाया गया, जहां से पार्थिव शरीर को सेना के एक वाहन में उनके पैतृक गांव बिंझोल लाया गया। बिंझोल में पुष्पांजलि समारोह और बंदूकों से सलामी देने के बाद शहीद सैन्य अधिकारी का अंतिम संस्कार किया गया।

शहीद मेजर ढोचक के शहर स्थित घर से उनके पैतृक गांव बिंझोल के बीच की आठ किलोमीटर की दूरी को पूरा करने में अंतिम यात्रा को करीब तीन घंटे लगे क्योंकि इस दौरान नम आंखों के साथ बड़ी संख्या में लोग सड़क के किनारे खड़े हुए थे।

शहीद अधिकारी के अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्यों के अलावा सेना के वरिष्ठ अधिकारी, ग्रामीण और आस-पास के लोग भी शामिल हुए।

मेजर ढोचक का परिवार अक्टूबर में पानीपत स्थित अपने नए घर में जाने वाला था। उनका परिवार किराए के मकान में रह रहा था। पड़ोसियों ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि वह (मेजर ढोचक) तिरंगा में लिपटे ताबूत में लौटेंगे।

पानीपत में मेजर ढोचक के आवास पर शुक्रवार सुबह से ही लोग शोक जताने के लिए एकत्र होने लगे थे। जब उनका पार्थिव शरीर लाया गया तो माहौल गमगीन हो गया।

पानीपत में उनके घर से जब गांव के लिए अंतिम यात्रा शुरू हुई तो सड़क के दोनों ओर तिरंगा लिए स्कूली बच्चे बड़ी संख्या में खड़े थे।

'भारत माता की जय', 'जब तक सूरज चांद रहेगा, आशीष तेरा नाम रहेगा' जैसे नारों की गूंज दूर-दूर तक सुनाई दे रही थी। अंतिम यात्रा वाले मार्ग पर बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थीं।

उनके गांव के एक बुजुर्ग ने कहा, ''हमें उनके जाने का बहुत दुख है लेकिन देश के लिए शहादत देने वाले मेजर आशीष पर गर्व भी है।''

मेजर ढोचक के परिवार में उनकी पत्नी, दो साल की बेटी और तीन बहनें हैं।

इस बीच, मुठभेड़ में शहीद हुए सेना के अन्य अधिकारी कर्नल मनप्रीत सिंह के पार्थिव शरीर को मोहाली जिले के मुल्लांपुर में उनके पैतृक स्थान पर लाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

शहीद सिंह के पार्थिव शरीर के उनके घर पहुंचने पर सेना की वर्दी पहने उनके छह साल के बेटे ने उन्हें सलाम किया। सैन्य अधिकारी की दो साल की एक बेटी भी है।

जब परिवार के अन्य सदस्य शहीद कर्नल को श्रद्धांजलि दे रहे थे, सेना के एक अधिकारी ने मनप्रीत के बेटे को संभाल रखा था।

कर्नल मनप्रीत की पत्नी, बहन, मां और परिवार के अन्य सदस्य गम में डूबे हुए हैं।

कश्मीर घाटी के कोकेरनाग इलाके में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में कर्नल सिंह और मेजर ढोचक सहित सेना के तीन कर्मी एवं जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक उपाधीक्षक शहीद हो गए थे।

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