मुंबई, 13 अक्टूबर बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार को 26/11 हमले की सबसे युवा पीड़िता और गवाह की याचिका पर विचार करने का निर्देश दिया। देविका रोतावन ने अपनी याचिका में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) योजना के तहत आवासीय परिसर आवंटित करने और उच्च शिक्षा के लिए व्यवस्था करने का अनुरोध किया है।
न्यायमूर्ति नितिन जामदार और न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की खंड पीठ ने अदालत की रजिस्ट्री को आदेश दिया कि वह रोतावन की याचिका महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को भेजें।
रोतावन (21) ने इस साल अगस्त में उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि वह और उनका परिवार गरीबी में रह रहे हैं और किराया नहीं देने की वजह से वे बेघर हो सकते हैं।
रोतावन ने अपनी याचिका में कहा है कि हमले के बाद केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों ने उनके घर का दौरा किया था और आश्वस्त किया था कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण के तहत आवास मुहैया कराया जाएगा और उनकी शिक्षा के साथ इलाज में भी मदद की जाएगी
रोतावन के वकील उत्सव बैन्स ने मंगलवार को अदालत से कहा कि उनकी याचिका पर कृपा के आधार पर विचार किया जाना चाहिए।
रोतावन 26 नवंबर 2008 को हमले के समय नौ साल की थी और वह अपने पता तथा भाई के साथ सीएसटी स्टेशन पर थी। हमले में वे तीनों जख्मी हो गए थे।
उनके पिता और भाई पहले की बीमारी की वजह से तभी से कोई काम नहीं कर पा रहे हैं।
उन्होंने याचिका में कहा कि उनके परिवार को कोई मदद नहीं मिली है।
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