मुंबई, 14 जून महाराष्ट्र सरकार ने पड़ोसी तेलंगाना में मेदिगड्डा बैराज के कारण राज्य में भूमि जलमग्न हो जाने से पैदा हुई समस्याओं का अध्ययन करने के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया है।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने एक हालिया आदेश में कहा कि ऐसा संभव हो सकता है कि तेलंगाना ने महाराष्ट्र को जो बताया था उससे ‘‘अलग तरीके से’’ बैराज का निर्माण किया हो।
इस परियोजना के लिए पूर्वी महाराष्ट्र में गड़चिरौली जिले के सिरोंचा इलाके में जमीन का अधिग्रहण किया गया।
पिछले साल तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने एक कार्यक्रम में इस बैराज का उद्घाटन किया था। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी शामिल हुए थे।
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दोनों राज्यों ने अगस्त 2016 में अंतर-राज्यीय सिंचाई परियोजना के निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।
शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने आदेश में कहा, ‘‘ऐसा हो सकता है कि तेलंगाना ने महाराष्ट्र सरकार को बैराज के संबंध में हुए अंतर-राज्यीय समझौते में जो बताया हो उससे अलग तरीके से इसका निर्माण किया हो।’’
सरकार ने कहा, ‘‘यह जांच करने की जरूरत है कि कितनी वन भूमि है जो बैराज के कारण जलमग्न होगी।’’
आदेश में कहा गया है कि समिति तेलंगाना सरकार के सामने सिरोंचा में उन किसानों को मुआवजा देने का मुद्दा भी उठाएगी जिनकी जमीन जलमग्न हुई है।
नागपुर के मंडलायुक्त के नेतृत्व वाली समिति को एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।
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