देश की खबरें | महाराष्ट्र: ईडी ने राकांपा नेता जयंत पाटिल से पूछताछ की, विपक्ष ने बदले की भावना का आरोप लगाया

नागपुर/मुंबई, 22 मई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता जयंत पाटिल से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा सोमवार को की गई पूछताछ पर कड़ी प्रतिक्रिया आई और पार्टी सांसद सुप्रिया सुले ने दावा किया कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है जबकि शिवसेना (यूबीटी) के आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि देश तानाशाही की ओर बढ़ रहा है।

राकांपा की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख पाटिल से ईडी मुंबई स्थित अपने कार्यालय में धनशोधन के मामले में पूछताछ कर रही है। वह पूर्वाह्न करीब 11 बजकर 50 मिनट पर ईडी कार्यालय पहुंचे।

मामला दिवालिया हो चुकी वित्तीय सेवा फर्म आईएल एंड एफएस में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है।

दक्षिण मुंबई स्थित ईडी कार्यालय जाने से पहले पाटिल ने कहा कि विपक्ष का हिस्सा होने के कारण इस तरह की पीड़ा का सामना करना पड़ता है।

आदित्य ने नागपुर हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से कहा, “सच्चाई, जो कभी कभी सरकार के खिलाफ होती है, उसका साथ देने वालों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद से दबाव डाला जा रहा है और यह चलन पूरे देश में देखा जा सकता है। मैं भयभीत हूं कि देश लोकतंत्र से तानाशाही शासन की ओर बढ़ रहा है।"

पाटिल से पूछताछ के बारे में राकांपा नेता और लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले ने कहा, “देश में पिछले कुछ वर्षों में ईडी या सीबीआई के सभी मामलों में, 90 से 95 प्रतिशत मामले विपक्षी नेताओं के खिलाफ हैं। इसके बारे में मीडिया द्वारा भी व्यापक रूप से कहा गया है। जो विपक्ष में है उसे जांच एजेंसियों से आसानी से नोटिस मिल जाता है।”

सुले ने हालांकि जांच एजेंसियों के अधिकारियों का बचाव किया।

राकांपा नेता ने कहा, “उन गरीब अधिकारियों की गलती नहीं है। पहले (संप्रग शासन के दौरान) जांच एजेंसियां ​​स्वायत्त थीं, लेकिन अब उन्हें किसी अदृश्य हाथ द्वारा चलाया जाता है। मौजूदा सरकार के खिलाफ बोलने वाले हर व्यक्ति को नोटिस मिलता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरे लिए नयी बात नहीं है। यह देश में पिछले आठ-नौ साल से हो रहा है।’’

आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र में पर्यावरण संबंधी मुद्दों से निपटने को लेकर शिंदे-फडणवीस सरकार की भी आलोचना की।

उन्होंने कोराडी बिजली उत्पादन परियोजना के विस्तार के बारे में बात की और बिजली उत्पादन परियोजनाओं की राख के कारण नागपुर जिले के नंदगांव और वारेगांव गांवों की "बिगड़ती" स्थिति पर भी चिंता जताई।

शिवसेना (यूबीटी) के नेता ने दावा किया, "पर्यावरण मंत्री के रूप में मेरे कार्यकाल के दौरान, राख के तालाब को साफ करने में काफी प्रगति हुई थी, लेकिन अब यह फिर से भर रहा है, जिससे क्षेत्र में जीवन स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।"

उनके साथ पार्टी के सहयोगी और विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे भी थे।

आदित्य ने आरोप लगाया कि राज्य के अन्य हिस्सों में छह बिजली इकाइयों को बंद कर दिया गया है, जिससे लोगों की नौकरी चली जाएगी।

इससे पहले दिन में राकांपा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पाटिल को समन जारी किए जाने के खिलाफ दक्षिण मुंबई में ईडी कार्यालय के बाहर धरना दिया।

प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि केंद्र और ईडी "राजनीतिक प्रतिशोध" में लिप्त हैं।

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