जबलपुर, 19 जून मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 14-वर्षीय उस लड़की के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी है, जिसका कुछ महीने पहले राज्य के सिंगरौली जिले में कथित तौर पर अपहरण कर बलात्कार किया गया था।
अदालत ने अधिकारियों को डीएनए परीक्षण के लिए भ्रूण संरक्षित रखने का भी निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति जी एस अहलूवालिया ने हाल ही में दिए अपने आदेश में कहा कि किसी भी खतरे की स्थिति में गर्भपात कराने वाले चिकित्सक और राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं होंगे तथा गर्भपात केवल पीड़िता के माता-पिता के जोखिम और खर्च पर ही किया जाएगा।
अदालत ने कहा कि पीड़िता के माता-पिता अपनी बेटी को गर्भपात की प्रक्रिया के लिए सिंगरौली के जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) के पास ले जा सकते हैं।
अदालत ने कहा कि अगर सीएमएचओ को लगता है कि लड़की को बेहतर इलाज के लिए किसी ‘मल्टीस्पेशलिटी’ अस्पताल में भेजने की जरूरत है, तो वह उसे गर्भपात के लिए उक्त अस्पताल में रेफर कर सकते हैं।
जिला चिकित्सा बोर्ड, सिंगरौली की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अगर भ्रूण में पर्याप्त असामान्यताएं हैं और चिकित्सा बोर्ड द्वारा गर्भपात को मंजूरी दी गई है तो गर्भावस्था की किसी भी अवधि में गर्भ को पंजीकृत चिकित्सक द्वारा समाप्त किया जा सकता है।
भ्रूण को संरक्षित रखने का निर्देश देते हुए अदालत ने कहा कि इसे (भ्रूण को) तुरंत जांच एजेंसी को सौंप दिया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी को भ्रूण अपने कब्जे में लेने की तिथि से दो दिन के भीतर "डीएनए फिंगरप्रिंट प्रयोगशाला" में भेजने का निर्देश दिया जाता है।
स्थानीय पुलिस सूत्रों के अनुसार, किशोरी इस वर्ष की शुरुआत में लापता हो गई थी और जिले के मोरवा पुलिस थाने में अपहरण का मामला दर्ज किया गया था।
एक महीने से अधिक समय बाद जब उसका पता चला, तो नाबालिग को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया, जिससे पता चला कि वह गर्भवती है। पुलिस ने बाद में भारतीय दंड संहिता और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत बलात्कार के आरोप दर्ज किये।
इसके बाद पीड़िता के पिता ने अपनी बेटी का गर्भ समाप्त कराने के लिए अदालत का रुख किया था।
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