जरुरी जानकारी | मध्यप्रदेश सरकार ने निवेशक सम्मेलन से पहले निवेश आकर्षित करने को सात नीतियों को मंजूरी दी

भोपाल, 19 फरवरी मध्यप्रदेश के द्विवार्षिक निवेशक शिखर सम्मेलन से पहले राज्य मंत्रिमंडल ने रियल एस्टेट से लेकर स्टार्टअप, नवीकरणीय ऊर्जा और होटल जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए सात नई नीतियों को मंजूरी दी है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में एकीकृत टाउनशिप नीति, लघु उद्योगों के विकास के लिए नीति, स्टार्टअप योजना, नागर विमानन नीति, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) में लेक व्यू होटल विकसित करने और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) तथा जैव ईंधन के लिए नीतियों को मंजूरी दी गई।

मध्यप्रदेश में 24-25 फरवरी को वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन (जीआईएस)-2025 का आयोजन होगा।

राज्य सरकार ने बयान में कहा कि ‘एकीकृत टाउनशिप नीति-2025’ का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में रियल एस्टेट परियोजनाओं में निजी निवेश को प्रोत्साहित करना है, जिससे न केवल रोजगार पैदा होगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस नीति का उद्देश्य ‘लैंड पूलिंग’ के माध्यम से भूमि का विकास करके बड़े टाउनशिप विकसित करना है। राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण के साथ-साथ सड़क, पानी और सीवरेज लाइनों और बिजली ट्रांसफार्मर जैसे बाहरी बुनियादी ढांचे के विकास की जिम्मेदारी लेगी।

एकीकृत टाउनशिप उन क्षेत्रों में लागू की जाएगी जहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। नीति के अनुसार, पांच लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए न्यूनतम 10 हेक्टेयर और पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए 20 से 40 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है।

डेवलपर्स को सक्षम प्राधिकारी के पास पंजीकरण कराना होगा। राज्य स्तर पर प्रधान सचिव और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति टाउनशिप प्रस्तावों को मंजूरी देगी।

शहरी एवं ग्रामीण निवेश निदेशालय टाउनशिप नीति के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी होगा।

नीति में समय पर मंजूरी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट, कॉलोनी नियम में छूट, विकास योजना में आसान संशोधन, हरित एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो), गैर-पारंपरिक ऊर्जा उपयोग के लिए एफएआर और किफायती आवास इकाइयों के लिए अतिरिक्त एफएआर का वादा किया गया है। प्रस्तावित भूमि उपयोग के रूपांतरण को मंजूरी देने के लिए विभाग स्तर पर एक सक्षम समिति को अधिकृत किया जाएगा।

बयान में कहा गया है कि यह नीति राज्य में संगठित शहरीकरण को बढ़ावा देगी। वर्तमान में कॉलोनियां छोटे भूखंडों पर विकसित की जाती हैं, जिससे व्यवस्थित बुनियादी ढांचे की योजना बनाने में बाधा उत्पन्न होती है।

राज्य मंत्रिमंडल ने सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए नई मध्यप्रदेश एमएसएमई विकास नीति-2025 को भी मंजूरी दी। यह नीति एमएसएमई को मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स नीति-2025 और निर्यात नीति-2025 का लाभ प्रदान करेगी।

उद्योग संवर्धन नीति-2025 के तहत एमएसएमई विभाग को एमएसएमई श्रेणी में वर्गीकृत बड़ी इकाइयों को अनुकूलित पैकेज देने के लिए अधिकृत किया जाएगा।

प्रोत्साहनों में 40 प्रतिशत तक पूंजी सहायता, निर्यात इकाइयों के लिए रियायतें और माल ढुलाई सब्सिडी शामिल हैं।

नई नीति में 100 से अधिक नौकरियां प्रदान करने वाले मझोले उद्यमों के लिए 1.5 गुना सब्सिडी, रोजगार सृजन क्षेत्रों में पांच वर्षों के लिए प्रति कर्मचारी प्रति माह 5,000 रुपये और कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए 13,000 रुपये जैसे वित्तीय प्रोत्साहन शामिल हैं।

एमएसएमई एक्सचेंज, लीन इंजीनियरिंग, जांच प्रयोगशाला और टेक्नोलॉजी हस्तांतरण जैसे नए क्षेत्रों के लिए भी सहायता दी जाएगी। पहली बार लॉजिस्टिक्स, रिसाइकिलिंग (पुनर्चक्रण), मोटर वाहन कबाड़ और सेवा क्षेत्र में शोध एवं विकास जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा।

मध्यप्रदेश स्टार्टअप नीति एवं कार्यान्वयन योजना 2025, स्टार्टअप और इन्क्यूबेटर के लिए वित्तीय और गैर-वित्तीय, दोनों तरह की सहायता प्रदान करेगी।

मध्यप्रदेश ईवी संवर्धन बोर्ड के गठन को भी मंजूरी दी गई है।

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