जरुरी जानकारी | भारत में पाम खेती को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता: ओपीडीपीए

नई दिल्ली, चार अगस्त भारत में आयल पॉम की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए एक दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता है क्योंकि देश मौजूदा समय में खाद्व तेलों की जरुरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर है। तेल प्रसंस्करणकर्ताओं के निकाय ओपीडीपीए ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

पाम तेल विकासकर्ता एवं प्रसंस्करणकर्ता संघ (ओपीडीपीए) ने कहा कि पूर्वोत्तर के क्षेत्र में पाम तेल के लिये खेती की बहुत बड़ी गुंजाइश है, अकेले अरुणाचल प्रदेश और असम में इसके तहत दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र को लाने की क्षमता मौजूद है।

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ओपीडीपीए के अध्यक्ष संजय गोयनका ने एक बयान में कहा, ‘‘इस फसल को पूरे भारत में आवश्यक गति देने के लिए एक मजबूत और दीर्घकालिक नीति तंत्र की आवश्यकता है।’’

मौजूदा समय में, अपनी क्षमता के मुकाबले देश में पॉम की खेती बहुत ही नगण्य है। गोयनका ने कहा कि इस फसल ने आंध्र प्रदेश में किसानों के जीवन में बदलाव ला दिया है और पूर्वोत्तर राज्यों में भी इसका अनुकरण किया जा सकता है।

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पाम की फसल एक काफी लाभकारी फसल है जिसमें अन्य वाणिज्यिक फसलों की तुलना में प्रति एकड़ निवेश पर सबसे अधिक लाभ की क्षमता है।

इसने कहा कि इसके सदस्यों ने पहले ही एक जनाधार बना लिया है और फसल के लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए उत्तर पूर्वी राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

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