नयी दिल्ली, एक दिसंबर लोकसभा में बुधवार को सहायता प्राप्त जननीय प्रौद्योगिकी (विनियमन) विधेयक, 2021 को मंजूरी दी गयी, जिसमें अंतर गर्भाशयी गर्भाधान से जुड़े विषयों पर दिशानिर्देशों एवं व्यवस्था का मानकीकरण करने तथा महिलाओं एवं बच्चों को शोषण से संरक्षण प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।
लोकसभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक पहले सितंबर 2020 में सदन में आया था और इसे स्थायी समिति को भेज दिया गया था। इस पर संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट आई और इसके 46 सुझावों में से 22 सुझाव पर संशोधन के रूप में विधेयक लाया गया है।
उन्होंने कहा कि इनमें से शेष कई सुझावों को नियम बनाते समय शामिल किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि देश में काफी क्लीनिक ऐसे चल रहे हैं जो कृत्रिम गर्भाधान (आईवीएफ) सहित सहायक प्रजनन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं और इनके लिये कोई नियमन नहीं है और अगर इसका नियमन नहीं किया गया तब यह उद्योग का रूप ले सकता है।
मांडविया ने कहा, ‘‘ यह विधेयक इनका नियमन करने के लिये लाया गया है।’’
मंत्री ने कहा कि इस तकनीक के जरिये लोग लिंग का चयन करते हैं और बहु भ्रूण हस्तांतरण भी किया जा सकता है, ऐसे में इसका नियमन जरूरी था।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने कहा कि कोई भी अगर अनैतिक काम करता है तब उसे बख्शा नहीं जा सकता है और इस संबंध में सजा का प्रावधान होना ही चाहिए।
मंत्री के जवाब के बाद सदन ने कुछ सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।
इससे पहले, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस विधेयक को निचले सदन में पेश किये जाने के संबंध में कुछ सदस्यों के व्यवस्था का प्रश्न उठाये जाने को खारिज कर दिया।
विधेयक पेश करते समय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मांडविया ने कहा कि ऐसी तकनीक में इंजेक्शन देना पड़ता है जिससे महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा भ्रूण हस्तांतरण और भ्रूण बैंकिंग के लिये भी व्यवस्था बनाने की जरूरत थी, ऐसे में यह विधेयक लाया गया है।
चर्चा में कांग्रेस के कार्ति चिदंबरम, भाजपा की हीना गावित, जनता दल (यू) के आलोक कुमार सुमन, बसपा की संगीता आजाद, तृणमूल कांग्रेस की काकोली घोष, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सुप्रिया सुले, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन, बीजू जनता दल के अभिनव मोहंती, माकपा के ए एम आरिफ, तृणमूल कांग्रेस की प्रतिमा मंडल और निर्दलीय नवनीत कौर राणा आदि ने हिस्सा लिया।
विधेयक के प्रस्ताव में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) का चलन काफी तेजी से बढ़ा है। वैसे तो कृत्रिम गर्भाधान (आईवीएफ) सहित सहायक प्रजनन तकनीक ने बांझपन के शिकार तमाम लोगों में नई उम्मीदें जगा दी हैं, लेकिन इससे जुड़े कई कानूनी, नैतिक और सामाजिक मुद्दे भी सामने आए हैं।
इसमें कहा गया है कि इस वैश्विक प्रजनन उद्योग के प्रमुख केन्द्रों में अब भारत भी शामिल हो गया है। भारत में इससे संबंधित क्लीनिक अब जननकोश दान करना, अंतर गर्भाशयी गर्भाधान (आईयूआई), आईवीएफ, आईसीएसआई, पीजीडी और गर्भकालीन सरोगेसी जैसी लगभग सभी तरह की एआरटी सेवाएं मुहैया करा रहे हैं। हालांकि, भारत में इस तरह की अनेक सेवाएं मुहैया कराने के बावजूद संबंधित प्रोटोकॉल का अब तक कोई मानकीकरण नहीं हो पाया है और इस बारे में सूचनाएं देने का चलन अब भी काफी हद तक अपर्याप्त है।
सहायक प्रजनन तकनीक सेवाओं के नियमन का मुख्य उद्देश्य संबंधित महिलाओं एवं बच्चों को शोषण से संरक्षण प्रदान करना है।
दीपक हक वैभव
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