नयी दिल्ली, 23 जून श्रम और रोजगार मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान दो करोड़ भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों को 4,957 करोड़ रुपये की नकदी सहायता मुहैया करायी गयी।
श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘एक उल्लेखनीय कदम के रूप में, राज्य सरकारों ने मंत्रालय के 24 मार्च 2020 को जारी एक परामर्श के आधार पर लॉकडाउन के दौरान देश भर के लगभग दो करोड़ पंजीकृत भवन एवं अन्य निर्माण मजदूरों को आज की तारीख तक 4957 करोड़ रुपये की नकदी सहायता मुहैया करायी।’’
यह भी पढ़े | 7th Pay Commission: कोरोना संकट से अधर में लटकी सरकारी कर्मचारियों की यह मांग, जल्द फैसले की उम्मीद नहीं.
बयान के मुताबिक इस प्रक्रिया में करीब 1.75 करोड़ लेनेदेन प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिये सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में किए गए।
लॉकडाउन के दौरान प्रति श्रमिक 1,00 से 6,000 रुपये की नकद मदद के अलावा कुछ राज्यों ने अपने यहां मजदूरों को भोजन तथा राशन भी उपलब्ध कराया।
यह भी पढ़े | जम्मू-कश्मीर: पुलवामा जैसा हमला दोहराने की साजिश में जैश-ए-मोहम्मद, डीजीपी दिलबाग सिंह ने किया अहम खुलासा.
श्रम मंत्रालय निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए सभी राज्य सरकारों और राज्य कल्याण बोर्ड के बीच समन्वय करने वाला नोडल केंद्रीय मंत्रालय है।
मंत्रालय ने कहा कि मजदूरों को सबसे अधिक जरूरत के वक्त समय से नकद सहायता पहुंचाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी गयी।
देश के असंगठित क्षेत्र के मजदूरों में भवन और अन्य निर्माण श्रमिक (बीओसीडब्ल्यू) सर्वाधिक निर्बल वर्ग है। इनमें से एक बड़ी संख्या अपने गृह राज्यों से दूर अलग अलग राज्यों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर हैं। वे राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय भूमिका अदा करते हैं, फिर भी वे खुद को समाज के हाशिये पर पाते हैं।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)











QuickLY