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आर्टेमिस-2 मिशन लॉन्च, 50 साल बाद चांद की ओर इंसानों की उड़ान
इंडोनेशिया में आया 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप
अमेरिका ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति से हटाए प्रतिबंध
ईंधन की बढ़ती कीमतों के लिए ईरान जिम्मेदार: ट्रंप
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिकी जनता के नाम लिखा खुला पत्र
भारत के रक्षा निर्यात में वित्त वर्ष 2026 में 62% की बड़ी उछाल
भारत के रक्षा निर्यात में वित्त वर्ष 2026 में 62% की बड़ी उछाल
सरकार ने गुरुवार को बताया कि भारत के रक्षा निर्यात में वित्त वर्ष 2025-26 में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 23,622 करोड़ रुपए के मुकाबले 62.66 प्रतिशत ज्यादा है.
सरकार के मुताबिक, इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक उपक्रम (डीपीएसयू) और निजी क्षेत्र, दोनों का अहम योगदान रहा. कुल निर्यात में डीपीएसयू का हिस्सा 54.84 प्रतिशत और निजी कंपनियों का 45.16 प्रतिशत रहा. रक्षा मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि यह उपलब्धि भारत को दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातक देशों में शामिल करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप है.
भारत अब केवल रक्षा प्रणालियों और उप-प्रणालियों का वैश्विक साझेदार ही नहीं है, बल्कि वित्त वर्ष 2026 तक 80 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है. साथ ही, निर्यातकों की संख्या भी बढ़कर 128 से 145 हो गई है, जो 13.3 प्रतिशत की वृद्धि है.
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिकी जनता के नाम लिखा खुला पत्र
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका की जनता के नाम एक भावुक और आलोचनात्मक खुला पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को "बेतुका और खर्चीला" करार दिया है. पेजेश्कियान ने अपने पत्र की शुरुआत उन अमेरिकी नागरिकों को संबोधित करते हुए की, जो "झूठे नैरेटिव और विकृतियों के बीच सच्चाई की तलाश कर रहे हैं." उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरानी लोगों की अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों की जनता से कोई दुश्मनी नहीं है.
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने पत्र में तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि इस्राएल ने अमेरिका को इस युद्ध में घसीटा है. उन्होंने पूछा, "क्या यह सच नहीं है कि अमेरिका इस आक्रामकता में इस्राएल के प्रतिनिधि के रूप में उतरा है और उस शासन द्वारा जोड़-तोड़ का शिकार हुआ है? क्या वाकई अमेरिकी सरकार की प्राथमिकताओं की सूची में अमेरिका पहले स्थान पर है?"
पेजेश्कियान ने चेतावनी दी कि दुनिया आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है और टकराव का रास्ता पहले से कहीं अधिक आत्मघाती और निरर्थक है. उन्होंने लिखा कि टकराव और जुड़ाव के बीच का चुनाव आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेगा.
इस पत्र में राष्ट्रपति ने अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत का जिक्र नहीं किया. साथ ही, उन्होंने डॉनल्ड ट्रंप के उस दावे पर भी कुछ नहीं कहा, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि ईरान ने खुद अमेरिका से युद्धविराम की मांग की है. बता दें कि ईरानी विदेश मंत्रालय पहले ही ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर चुका है.
ईंधन की बढ़ती कीमतों के लिए ईरान जिम्मेदार: ट्रंप
ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में सफलताओं का दावा करने के बाद, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अब युद्ध के आर्थिक प्रभावों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है. ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में हुई भारी वृद्धि के लिए सीधे तौर पर ईरानी शासन को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि यह उछाल पूरी तरह से ईरानी शासन द्वारा कमर्शियल तेल टैंकरों और पड़ोसी देशों पर किए गए "आतंकवादी हमलों" का परिणाम है, जिनका इस संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं था.
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इस युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका में गैसोलीन की औसत कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो साल 2022 के बाद पहली बार हुआ है. साथ ही ईंधन की बढ़ती कीमतों ने फिलीपींस जैसे देशों में गंभीर संकट पैदा कर दिया है, जो पिछले हफ्ते 'राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल' घोषित करने वाला पहला देश बन गया.
डॉनल्ड ट्रंप का मानना है कि जैसे ही सैन्य अभियान अपने अंतिम चरण में पहुंचेगा, तेल की कीमतों में स्थिरता आनी शुरू हो जाएगी. फिलहाल, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और तेल टैंकरों का सुरक्षित मार्ग बहाल करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है.
अमेरिका ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति से हटाए प्रतिबंध
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बुधवार को वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के खिलाफ लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने की घोषणा की है. यह फैसला रोड्रिग्ज के पद संभालने के कुछ समय बाद आया है. वॉशिंगटन ने उनके पूर्ववर्ती निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल कर दिया था, जिन्हें 3 जनवरी को राजधानी काराकास में अमेरिकी बलों द्वारा की गई एक छापेमारी के दौरान हिरासत में लिया गया था.
प्रतिबंध हटने का क्या होगा असर?
विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय के अनुसार, रोड्रिगेज का नाम अब "विशेष रूप से नामित नागरिकों की सूची" से हटा दिया गया है. इस कदम के बाद अब रोड्रिगेज अमेरिकी कंपनियों और निवेशकों के साथ अधिक स्वतंत्रता से काम कर सकेंगी. इससे वेनेजुएला और अमेरिका के बीच आर्थिक लेनदेन के रास्ते खुलेंगे और इसे दोनों देशों के बीच बिगड़े हुए कूटनीतिक रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
डेल्सी रोड्रिगेज ने एक्स पर इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक "महत्वपूर्ण कदम" बताया. उन्होंने कहा, "हमें विश्वास है कि यह प्रगति हमारे देश पर लगे अन्य प्रतिबंधों को हटाने का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिससे हमारे लोगों के लाभ के लिए प्रभावी द्विपक्षीय सहयोग एजेंडा तैयार किया जा सकेगा."
इंडोनेशिया में आया 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप
इंडोनेशिया के उत्तरी मोलुक्का सागर में गुरुवार तड़के 7.4 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, भूकंप का केंद्र तेर्नेत शहर से लगभग 127 किलोमीटर पश्चिम में और जमीन से 35 किलोमीटर की गहराई पर था. इस शक्तिशाली झटके के बाद इंडोनेशिया के साथ-साथ पड़ोसी देशों फिलीपींस और मलेशिया के लिए भी सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी, जिसे अब हटा लिया गया है.
भूकंप के कारण मलबे की चपेट में आने से मनाडो क्षेत्र में एक व्यक्ति की मौत की खबर है. स्थानीय मीडिया की फुटेज में कई इमारतों को नुकसान पहुंचते दिखाया गया है. इंडोनेशियाई मौसम विज्ञान एजेंसी ने उत्तरी मालुकु प्रांत में 30 सेंटीमीटर और उत्तर-पूर्वी सुलावेसी के बिटुंग में 20 सेंटीमीटर ऊंची सुनामी लहरें दर्ज कीं. हालांकि, अमेरिकी निगरानी केंद्र ने पहले 1,000 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक सुनामी लहरों की चेतावनी दी थी, लेकिन स्थिति नियंत्रण में होने के बाद अलर्ट वापस ले लिया गया.
इंडोनेशिया भौगोलिक रूप से 'पैसिफिक रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है. यह एक ऐसा टेक्टोनिक जोन है जहां दुनिया की सबसे अधिक भूकंपीय और ज्वालामुखी गतिविधियां होती हैं, जिसके कारण यहां अक्सर बड़े भूकंप आते रहते हैं.
आर्टेमिस-2 मिशन लॉन्च, 50 साल बाद चांद की ओर इंसानों की उड़ान
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का आर्टेमिस-II मिशन बुधवार शाम (1 अप्रैल) फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च हुआ. इस ऐतिहासिक मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री, जिनमें तीन अमेरिकी और एक कनाडाई चांद की तरफ रवाना हुए. रॉकेट के उड़ान भरते ही कोकोआ बीच और आसपास के इलाकों में मौजूद हजारों दर्शकों ने इस पल को उत्सव की तरह मनाया.
मिशन का क्या है मुख्य उद्देश्य
आर्टेमिस-II मिशन का मुख्य उद्देश्य ओरियन अंतरिक्ष यान का परीक्षण करना है, जो भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों को चांद तक ले जाने और वापस लाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. यह नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम की दूसरी उड़ान है. इससे पहले 2022 में आर्टेमिस I मिशन के तहत बिना चालक दल के ओरियन यान को चांद की कक्षा में भेजा गया था.
यह मिशन कुल 10 दिनों तक चलेगा और इसमें अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 2 लाख 52 हजार मील (406,000 किमी) दूर तक जाएंगे, जो अब तक इंसानों की सबसे दूर की अंतरिक्ष यात्रा होगी. हालांकि इस मिशन में चांद पर लैंडिंग नहीं की जाएगी, लेकिन अंतरिक्ष यात्री जीवन‑रक्षक प्रणालियों, संचार व्यवस्था और यान के विभिन्न तकनीकी हिस्सों का परीक्षण करेंगे.
चांद पर इंसानों की वापसी
नासा का लक्ष्य 2028 तक चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास फिर से इंसानों को उतारना और वहां स्थायी चांद बेस की नींव रखना है. आर्टेमिस कार्यक्रम को भविष्य में मंगल ग्रह पर मानव मिशन की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है, वहीं चीन की 2030 तक चांद पर अंतरिक्ष यात्री भेजने की योजना के बीच यह मिशन रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
ईरान पर हमला कर उसे पाषाण युग में पहुंचा देंगे: ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को और तेज करने की चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिकी सैनिक अगले दो–तीन हफ्तों तक "बेहद कठोर" हमले जारी रखेंगे और ईरान को पाषाण युग में वापस पहुंचा देंगे. ट्रंप ने दावा किया कि अब तक अमेरिकी कार्रवाई अपने सभी लक्ष्यों से कहीं आगे निकल चुकी है और ईरान पर दबाव बढ़ता जाएगा.
पहले जैसी स्थिर और भरोसेमंद नहीं रही अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था: बोरिस पिस्टोरियस
अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर से दावा किया है कि ईरान की सेना खत्म हो चुकी है. स्थानीय समयानुसार बुधवार को टीवी पर दिए 19 मिनट के संबोधन में ट्रंप ने कहा, "अभी सिर्फ एक महीना हुआ है, जब अमेरिकी सेना ने आतंक के दुनिया के नंबर वन स्पॉन्सर ईरान को टारगेट करते हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया था."
उन्होंने आगे कहा, "ईरान की नेवी खत्म हो गई है. उनकी एयरफोर्स बर्बाद हो गई है. उनके नेता अब मर चुके हैं. ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता बहुत कम कर दी गई हैं और हथियार फैसिलिटी टुकड़ों में उड़ा दी गई हैं."












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