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-गैस सिलेंडर के दाम 195 रुपये बढ़े, नई कीमत ₹2,000 से ज्यादा
-मध्य पूर्व में शांति के लिए चीन–पाकिस्तान की पांच सूत्रीय पहल
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल के बाद अब ईवी बन रही लोगों की पसंद
एशिया‑प्रशांत क्षेत्र में वाहन चालक तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि मध्य पूर्व युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है. अमेरिका‑इस्राएल और ईरान के बीच युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की सप्लाई लगभग ठप हो गई है, जिसे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अब तक की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा बताया है. इस मार्ग से जाने वाला 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल एशिया को जाता है, जिससे क्षेत्र में उपभोक्ताओं और सरकारों पर लागत का दबाव बढ़ गया है.
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ऑस्ट्रेलिया में, जहां लंबे फासलों के कारण परिवहन ईंधन पर निर्भरता अधिक है, मार्च में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लोन लेने वालों की संख्या दोगुनी हो गई. देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक एनएबी के मुताबिक, ईवी से जुड़े कॉर्पोरेट लोन पूछताछ में 88 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. एनएबी के बिजनेस बैंकिंग प्रमुख शेन डिचम ने कहा कि छोटे‑मध्यम उद्यम और बड़े ऑपरेटर ईंधन लागत से बचने और भविष्य की अनिश्चितता से निपटने के लिए ईवी को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं.
ऊर्जा कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी ईवी बिक्री को बढ़ावा दे सकती है, जहां अब तक चार्जिंग ढांचे की कमी और पेट्रोल वाहनों की पसंद के कारण मांग सीमित थी. जापान के इटोचू रिसर्च इंस्टीट्यूट के सानशिरो फुकाओ के अनुसार, ऊर्जा लागत बढ़ने से देश में ईवी की ओर झुकाव अब निर्णायक चरण में पहुंच रहा है. इस बढ़ती मांग से चीनी ईवी निर्माता भी लाभान्वित हो रहे हैं, जो घरेलू बिक्री में सुस्ती के बीच एशिया‑प्रशांत निर्यात बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए ब्रिटेन करेगा 35 देशों के साथ बैठक की मेजबानी
ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने बुधवार को घोषणा की है कि उनका देश इसी सप्ताह लगभग 35 देशों की एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित करेगा. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को फिर से खोलने के रास्तों पर चर्चा करना है. डाउनिंग स्ट्रीट में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्टार्मर ने बताया कि इस महत्वपूर्ण बातचीत का नेतृत्व ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर करेंगी.
इस चर्चा के दौरान उन सभी कूटनीतिक और राजनीतिक उपायों का आकलन किया जाएगा, जिनसे समुद्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता बहाल की जा सके. प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य वहां फंसे जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और महत्वपूर्ण वस्तुओं (तेल और गैस) की आवाजाही को फिर से शुरू करना है. इस बैठक में वे देश भी शामिल होंगे जिन्होंने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए थे.
अमेरिका-इस्राएल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से तेहरान ने इस जलमार्ग को लगभग बंद कर दिया है. दुनिया के कुल तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. प्रधानमंत्री स्टार्मर ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मार्ग को फिर से खोलना आसान नहीं होगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वर्तमान वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए ब्रिटेन के दीर्घकालिक हितों के लिए यूरोपीय सहयोगियों के साथ करीबी साझेदारी अब अनिवार्य हो गई है.
ईरान युद्ध की वजह से भारत में बढ़ सकती है कंडोम की कीमतें: रिपोर्ट
अमेरिका-इस्राएल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब ईंधन की कीमतों से निकलकर आम भारतीयों के निजी जीवन तक पहुंच गया है. द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कंडोम निर्माता वर्तमान में सप्लाई चेन में भारी बाधाओं और कच्चे माल की बढ़ती लागत का सामना कर रहे हैं. दरअसल, कंडोम के निर्माण और उसकी पैकेजिंग में पेट्रोकेमिकल्स एक अनिवार्य घटक होता है, जिसकी वैश्विक आपूर्ति युद्ध के कारण बुरी तरह चरमरा गई है.
मार्च में भारत सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के जवाब में पेट्रोकेमिकल उत्पादन में कटौती करने का फैसला किया था. इस कदम का मुख्य उद्देश्य सीमित संसाधनों को फ्यूल और एलपीजी (रसोई गैस) जैसे उच्च-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सुरक्षित रखना था. इसके परिणामस्वरूप, कंडोम उद्योग को मिलने वाले कच्चे माल की कमी हो गई है और उत्पादन लागत में भारी उछाल आया है.
विशेषज्ञों और उद्योग जगत के सूत्रों ने चेतावनी दी है कि कंडोम की कीमतों में कोई भी वृद्धि भारत के परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण लक्ष्यों को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकती है. भारत जैसे दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश में यह उद्योग 'हाई वॉल्यूम और लो मार्जिन' मॉडल पर चलता है क्योंकि यहां के ग्राहक कीमतों को लेकर काफी संवेदनशील हैं. ऐसे में कच्चे माल की किल्लत एक गंभीर सामाजिक चुनौती का रूप ले सकती है.
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, 'अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है'
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि उनके देश और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हो रही है. बुधवार को 'अल जजीरा' को दिए एक इंटरव्यू में अराघची ने उन खबरों का खंडन किया, जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान ने अमेरिका के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव का जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि हालांकि अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है, लेकिन इसे "बातचीत का आधार" नहीं माना जा सकता.
अराघची ने जोर देकर कहा कि ईरान को अमेरिकी पक्ष से सीधे और क्षेत्रीय मित्रों के माध्यम से संदेश प्राप्त होते रहते हैं, जिनका आवश्यकतानुसार जवाब दिया जाता है. उन्होंने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया कि ईरान में कोई अन्य पक्ष स्वतंत्र रूप से बातचीत कर रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी संदेश विदेश मंत्रालय के माध्यम से ही भेजे या प्राप्त किए जाते हैं, हालांकि सुरक्षा एजेंसियों के बीच भी संचार बना हुआ है.
पिछले सप्ताह अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से तेहरान को 15-सूत्रीय युद्धविराम योजना भेजी थी. हालांकि ईरानी मीडिया ने पहले दावा किया था कि तेहरान ने इसके बदले पांच सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव पेश किया है, लेकिन अराघची ने बुधवार को इन खबरों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि तेहरान ने न तो अमेरिकी प्रस्ताव का कोई जवाब दिया है और न ही अपनी ओर से कोई शर्त या प्रस्ताव पेश किया है. तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान जैसे देश वर्तमान में इस युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में जुटे हैं.
यूएन की चेतावनी: एक महीने का युद्ध अरब देशों की पूरी आर्थिक वृद्धि मिटा सकता है
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में अगर युद्ध एक महीने तक भी जारी रहता है, तो अरब देशों की बीते साल की पूरी आर्थिक वृद्धि खत्म हो सकती है. मंगलवार को जारी संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा सैन्य संघर्ष ने अरब क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं की गहरी और पुरानी संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर कर दिया है.
यूएनडीपी ने अनुमान लगाया है कि संघर्ष के चलते अरब देशों का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 3.7 से 6.0 प्रतिशत तक घट सकता है. इससे क्षेत्र को 120 अरब से 194 अरब डॉलर तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है, जो 2025 में अरब देशों द्वारा हासिल की गई कुल क्षेत्रीय आर्थिक वृद्धि से भी अधिक होगा. रिपोर्ट के अनुसार, इससे विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है.
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रिपोर्ट में ईरान के लिए हालात और भी गंभीर बताए गए हैं. यूएनडीपी ने कहा कि युद्ध से वहां “तेज आर्थिक संकुचन” की स्थिति पैदा हो सकती है. आर्थिक अनुमानों के मुताबिक, वास्तविक जीडीपी वृद्धि बिना युद्ध वाले परिदृश्य की तुलना में 8.8 से 10.4 प्रतिशत अंक तक गिर सकती है. इसके अलावा, 35 से 41 लाख लोगों के गरीबी रेखा के नीचे जाने का खतरा है, जिससे ईरान की गरीबी दर बढ़कर लगभग 41 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.
ईंधन संकट: ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने नागरिकों से की सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने की अपील
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीजी ने देश के नाम संबोधन देते हुए चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध के कारण होने वाले आर्थिक झटके अगले कई महीनों तक जारी रह सकते हैं. प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे जहां तक संभव हो निजी वाहनों के बजाय बस या ट्राम जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें ताकि ईंधन की बचत की जा सके.
प्रधानमंत्री अल्बानीजी ने अपने संबोधन में स्वीकार किया कि मध्य पूर्व के युद्ध ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि की है. उन्होंने कहा, "मैं समझता हूं कि इस समय सकारात्मक रहना कठिन है. ऑस्ट्रेलिया इस युद्ध में सक्रिय भागीदार नहीं है, लेकिन इसके बावजूद हर ऑस्ट्रेलियाई को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है."
कोयला और अन्य खनिजों का बड़ा निर्यातक होने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया अपनी जरूरत का 90 फीसदी ईंधन आयात करता है. होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण वहां के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की भारी किल्लत देखी जा रही है. फरवरी से अब तक ईंधन की कीमतों में एक-तिहाई से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने बुधवार से ईंधन कर में कटौती करने का फैसला किया है.
बाल्टिक सागर में फंसी हंपबैक व्हेल 'टिमी' की हालत नाजुक
जर्मनी के बाल्टिक सागर में पिछले चार हफ्तों से भटक रही 15 मीटर लंबी हंपबैक व्हेल, जिसे स्थानीय मीडिया ने 'टिमी' नाम दिया है, की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है. विशेषज्ञों और संरक्षणवादियों ने मंगलवार शाम को चेतावनी दी है कि व्हेल के बचने की संभावना अब बहुत कम रह गई है. सोमवार रात को जलस्तर बढ़ने के बाद व्हेल ने कुछ देर के लिए तैरना शुरू किया था, लेकिन मंगलवार दोपहर वह दोबारा पोएल द्वीप के पास उथले पानी में जाकर फंस गई.
टिमी के स्वास्थ्य के साथ कई गंभीर चुनौतियां जुड़ी हुई हैं. बाल्टिक सागर का पानी उसके प्राकृतिक आवास अटलांटिक महासागर की तुलना में कम खारा है, जिसके कारण व्हेल की त्वचा पर गहरे संक्रमण और घाव होने लगे हैं. इसके अलावा, उसके मुंह में अब भी मछली पकड़ने के पुराने जालों के अवशेष फंसे हुए हैं, जिन्हें बचाव दल पूरी तरह निकालने में असफल रहा है. हफ्तों से भोजन की कमी और बार-बार रेत के टीलों पर फंसने के कारण यह विशालकाय जीव शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो चुका है.
अधिकारियों ने बताया कि व्हेल अभी सांस ले रही है और थोड़ी हलचल भी कर रही है, लेकिन वह अपनी जगह से आगे बढ़ने में सक्षम नहीं दिख रही है. फिलहाल पर्यावरण विशेषज्ञ और प्रशासन स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं, हालांकि टिमी का जीवन बचाने के लिए समय तेजी से निकलता जा रहा है.
2025 में भारत में 65 बार हुआ इंटरनेट शटडाउन
भारत में वर्ष 2025 के दौरान 65 बार इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं, जो 2017 के बाद से सबसे कम संख्या है. हालांकि, वैश्विक डिजिटल अधिकार संगठन एक्सेस नाउ ने इसे अब भी "लोकतंत्र के लिए चिंताजनक रूप से ऊंचा" करार दिया है. संगठन के अनुसार, इंटरनेट शटडाउन नागरिक स्वतंत्रताओं, अभिव्यक्ति की आजादी और सूचना तक पहुंच पर गंभीर असर डालते हैं.
एक्सेस नाउ की रिपोर्ट "राइजिंग रिप्रेशन मीट्स ग्लोबल रेसिस्टेंस: इंटरनेट शटडाउन इन 2025" के मुताबिक, वर्ष 2025 में दुनिया भर के 52 देशों में कुल 313 जानबूझकर इंटरनेट बंदी दर्ज की गईं. यह संख्या 2016 में रिपोर्टिंग शुरू होने के बाद से अब तक की सबसे अधिक है, जो वैश्विक स्तर पर डिजिटल दमन में बढ़ोतरी की ओर इशारा करती है.
रिपोर्ट के अनुसार, लगातार दूसरे साल म्यांमार 95 इंटरनेट शटडाउन के साथ दुनिया में सबसे आगे रहा, जिससे उसने भारत को पीछे छोड़ दिया. इसके बावजूद, कुल आंकड़ों में भारत अब भी शीर्ष पर है. वर्ष 2016 से अब तक दुनिया भर में दर्ज 2,102 इंटरनेट शटडाउन में से 920 भारत में हुए हैं, जो लंबे समय से इंटरनेट बंदी के व्यापक उपयोग को दर्शाता है.
ओरेकल में बड़ी छंटनी, भारत में 12,000 कर्मचारियों की गई नौकरी
अमेरिकी आईटी कंपनी ओरेकल ने भारत में करीब 12,000 कर्मचारियों की छंटनी की है, जबकि अगले एक महीने के भीतर एक और बड़े स्तर पर छंटनी की आशंका जताई जा रही है. प्रभावित कर्मचारियों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कंपनी अब तक लगभग 30,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल चुकी है.
छंटनी से प्रभावित दो कर्मचारियों, जिनमें मानव संसाधन विभाग का एक कर्मचारी भी शामिल है, ने मीडिया को बताया कि भारत में ओरेकल के कुल कर्मचारियों की संख्या लगभग 30,000 है, जिसमें अब छंटनी का सामना कर चुके कर्मचारी भी शामिल हैं. कंपनी ने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करने से इनकार किया है.
जर्मनी में अब दिन में सिर्फ एक बार बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम
ईरान युद्ध के चलते आसमान छूती तेल की कीमतों के बीच जर्मनी की गठबंधन सरकार ने एक नया कानून लागू किया है. इसके तहत अब पेट्रोल पंप संचालक दिन में केवल एक बार (दोपहर 12 बजे) ही ईंधन की कीमतें बढ़ा सकेंगे. यह व्यवस्था पड़ोसी देश ऑस्ट्रिया के मौजूदा मॉडल पर आधारित है, जिसका उद्देश्य कीमतों में होने वाले अचानक उतार-चढ़ाव को रोकना और पारदर्शिता लाना है.
नए कानून के मुख्य बिंदु:
पेट्रोल पंप केवल दोपहर 12 बजे ही रेट बढ़ा सकते हैं.
ग्राहकों को राहत देने के लिए पंप संचालक दिन में किसी भी समय अपनी कीमतें घटा सकते हैं.
यदि कोई पेट्रोल पंप इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उस पर €100,000 (लगभग ₹90 लाख) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
अमेरिका और इस्राएल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू करने के बाद से जर्मनी में पेट्रोल की कीमतों में 15 फीसदी से अधिक का उछाल आया है. हालांकि सरकार ने यह कदम पारदर्शिता के लिए उठाया है, लेकिन एडीएसी (जर्मनी का प्रमुख ऑटोमोबाइल क्लब) और तेल खुदरा विक्रेताओं जैसे विशेषज्ञों ने इसके वास्तविक प्रभाव पर सवाल उठाए हैं.
यह कानून मंगलवार को आधिकारिक रूप से प्रकाशित कर दिया गया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है. सरकार का मानना है कि इससे कम से कम ग्राहकों को यह पता रहेगा कि दिन के किस समय ईंधन भरवाना उनके लिए सस्ता पड़ सकता है.
बगदाद में अमेरिकी महिला पत्रकार का अपहरण
अमेरिकी पत्रकार शेली किटलसन का मंगलवार, 31 मार्च को बगदाद में अपहरण कर लिया गया. इराकी अधिकारियों के अनुसार, वह सादून स्ट्रीट से अगवा की गईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने अपहरणकर्ताओं का पीछा शुरू किया. क्षेत्रीय समाचार वेबसाइट अल‑मॉनिटर ने उनकी पहचान की और उनकी सुरक्षित व तत्काल रिहाई की मांग की. किटलसन लंबे समय से इराक और सीरिया से रिपोर्टिंग कर रही हैं.
इराक के गृह मंत्रालय ने कहा कि अपहरण में दो गाड़ियां शामिल थीं. पीछा किए जाने के दौरान बाबिल प्रांत के अल‑हसवा इलाके के पास एक वाहन पलट गया. अधिकारियों के मुताबिक, एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया है और अपहरण में इस्तेमाल की गई एक गाड़ी जब्त की गई है, जबकि अन्य आरोपी अभी फरार हैं.
एक अमेरिकी अधिकारी ने आरोप लगाया कि इस अपहरण में ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया काताइब हिज्बुल्लाह की भूमिका हो सकती है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और वह मामले पर नजर बनाए हुए है.
अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता पर सुनवाई आज, सुप्रीम कोर्ट पहुंचेंगे ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप बुधवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे. अमेरिकी मीडिया के अनुसार, ट्रंप पहले ऐसे मौजूदा राष्ट्रपति होंगे जो सुप्रीम कोर्ट में किसी मौखिक बहस के दौरान मौजूद रहेंगे. यह सुनवाई इस महत्वपूर्ण सवाल पर है कि क्या अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को स्वतः ही अमेरिकी नागरिकता मिलनी चाहिए.
क्या है पूरा विवाद?
साल 1868 से, अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत अमेरिका की धरती पर पैदा होने वाले हर बच्चे को जन्म से ही नागरिकता मिलती आई है. राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इस नियम को बदलना चाहते हैं. उनके नए आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
किसे नागरिकता मिलेगी: यदि माता-पिता में से कम से कम एक अमेरिकी नागरिक है या उसके पास ग्रीन कार्ड है, तो बच्चे को नागरिकता मिलती रहेगी.
किसे नहीं मिलेगी: ट्रंप उन बच्चों की नागरिकता खत्म करना चाहते हैं जिनके माता-पिता अस्थायी रूप से (जैसे टूरिस्ट, विदेशी छात्र या विदेशी कर्मचारी) या बिना वैध दस्तावेजों के अमेरिका में रह रहे हैं.
ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही इस आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन निचली अदालतों ने इसे असंवैधानिक बताते हुए रोक दिया था. अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की बेंच के सामने है. नागरिक अधिकार समूहों ने इस आदेश के खिलाफ सामूहिक मुकदमा दायर किया है. उम्मीद जताई जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील मुद्दे पर अपना अंतिम फैसला जून या जुलाई तक सुना सकता है.
रूस का सैन्य विमान क्रीमिया में दुर्घटनाग्रस्त, 29 लोगों की मौत
रूस के रक्षा मंत्रालय के हवाले से रूसी समाचार एजेंसियों ने बुधवार सुबह जानकारी दी है कि क्रीमिया में एक रूसी सैन्य परिवहन विमान एएन-26 दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. इस हादसे में विमान में सवार सभी 29 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें 6 चालक दल के सदस्य और 23 यात्री शामिल थे.
रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह विमान क्रीमिया के ऊपर एक निर्धारित उड़ान पर था, जिससे मंगलवार शाम करीब 6 बजे संपर्क टूट गया था. शुरुआती जांच और मौके पर मौजूद सूत्रों के हवाले से 'टास' और 'आरआईए नोवोस्ती' ने बताया है कि विमान एक पहाड़ी चट्टान से टकराकर क्रैश हो गया.
मिग-21 हुआ रिटायर, तारीफ के साथ बदनामी भी मिली
रूसी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स के मुताबिक मंत्रालय का मानना है कि क्रैश का कारण कोई तकनीकी खराबी हो सकती है. शुरुआती रिपोर्टों में विमान पर किसी भी तरह के "बाहरी हमले" या हस्तक्षेप की संभावना से इनकार किया गया है.
दुर्घटनाग्रस्त हुआ एएन-26 परिवहन विमान सोवियत काल का डिजाइन किया गया एक मिलिट्री ट्रांसपोर्ट टर्बोप्रॉप विमान है. इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से सैनिकों और सैन्य उपकरणों को लाने ले जाने के लिए किया जाता है. क्रीमिया को रूस ने 2014 में यूक्रेन से अलग कर अपने क्षेत्र में मिला लिया था, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध माना जाता है. फिलहाल दुर्घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य के साथ-साथ विस्तृत जांच जारी है.
ईरान युद्ध पर बुधवार रात राष्ट्र को संबोधित करेंगे डॉनल्ड ट्रंप
व्हाइट हाउस ने घोषणा की है कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप बुधवार रात 9:00 बजे (भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 6:30 बजे) ईरान के साथ जारी युद्ध के संबंध में राष्ट्र को संबोधित करेंगे. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मंगलवार शाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी पुष्टि करते हुए लिखा कि राष्ट्रपति इस संबोधन के दौरान ईरान मामले पर एक महत्वपूर्ण अपडेट साझा करेंगे.
किशोरों को सच में बिगाड़ रहा है सोशल मीडिया, या हम ज्यादा डर रहे हैं
यह घोषणा राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों के भीतर ईरान के खिलाफ अपना सैन्य अभियान समाप्त कर सकता है. ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे सामरिक जलमार्ग को सुरक्षित रखना और उसे खुला रखना अब अन्य देशों की जिम्मेदारी होगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संबोधन में ट्रंप युद्ध विराम की शर्तों, शांति वार्ता की प्रगति या भविष्य की सैन्य रणनीति को लेकर कोई बड़ा एलान कर सकते हैं. पूरी दुनिया की नजरें इस संबोधन पर टिकी हैं, क्योंकि इसका असर न केवल मिडिल ईस्ट की सुरक्षा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और कूटनीतिक रिश्तों पर भी पड़ेगा.
ईरान युद्ध के बाद नाटो के साथ रिश्तों पर दोबारा सोचेगा अमेरिका: मार्को रुबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ईरान युद्ध समाप्त होने के बाद वॉशिंगटन को नाटो के साथ अपने संबंधों की "पुनः समीक्षा" करनी होगी. फॉक्स न्यूज से बात करते हुए रुबियो ने कहा कि इस संघर्ष के खत्म होने के बाद इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमें अपने देश के लिए इस गठबंधन और नाटो की उपयोगिता पर फिर से विचार करना होगा.
रुबियो ने स्पष्ट किया कि नाटो के भविष्य पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ही लेंगे. दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी सीनेट में रहते हुए रुबियो नाटो के सबसे मजबूत समर्थकों में से एक रहे हैं, लेकिन वर्तमान युद्ध की परिस्थितियों ने उनके रुख को बदलने पर मजबूर किया है. राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भी इस पूरे संघर्ष के दौरान नाटो सहयोगियों की तीखी आलोचना करते रहे हैं, क्योंकि 32 सदस्य देशों वाले इस संगठन के अधिकांश देशों ने युद्ध में सीधे शामिल होने के अमेरिकी आह्वान का विरोध किया है.
यूरोप के प्रमुख नाटो सदस्य - फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिका पर ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत करने का दबाव बना रहे हैं. इन देशों का मानना है कि सैन्य संघर्ष के बजाय बातचीत के जरिए ही स्थायी शांति संभव है.












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