हफ्तार बलों के प्रवक्ता, अहमद अल मोसमारी ने टीवी पर प्रसारित प्रेस वार्ता में कहा कि यह प्रस्ताव, “और कुछ नहीं बल्कि आंखों में धूल झोंकने और स्थानीय एवं अंतरराष्ट्रीय जनता को धोखा देना भर दिखाता है।”
उन्होंने तुर्की और कतर का संदर्भ देते हुए कहा, “यह पहल लीबिया में उनकी सही मंशा को ढंकने के मकसद से है।” ये दोनों देश, राजधानी त्रिपोली में संयुक्त राष्ट्र समर्थित सरकार के मुख्य समर्थक हैं। वहीं हफ्तार के बल पूर्वी लीबिया में प्रतिद्वंद्वी संसद के साथ संबद्ध हैं।
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तेल समृद्ध लीबिया में उस वक्त अराजकता उत्पन्न हो गई थी जब नाटो समर्थित विद्रोह ने 2011 में लंबे समय से तानाशाह रहे मोअम्मर गद्दाफी का तख्तापलट किया था, जिनकी बाद में हत्या कर दी गई थी। बाद में देश प्रतिद्वंद्वी पूर्व और पश्चिम आधारित प्रशासनों में बंट गया था और प्रत्येक प्रशासन का समर्थन सशस्त्र समूह तथा विदेशी सरकारें करती हैं।
त्रिपोली सरकार के प्रमुख, फयाज सर्राज ने शुक्रवार को संघर्षविराम की घोषणा की थी और सिर्ते और पास के जुफ्रा इलाके से सेना हटाने का आह्वान किया था जिसका अर्थ है कि हफ्तार बलों को वहां से हटना होगा।
एपी
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