नयी दिल्ली, दो जून सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकार्ड एसोसिएशन ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मुकदमों की सुनवाई में वकीलों को हो रही दिक्कतों का जिक्र करते हुये मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबड़े और शीर्ष अदालत के अन्य न्यायाधीशों से अनुरोध किया कि जुलाई से न्यायालय में नियमित सुनवाई शुरू की जाये।
शीर्ष अदालत ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर देश में लागू लॉकडाउन की वजह से 25 मार्च से अपना कामकाज सीमित कर रखा है और वह सिर्फ आवश्यक मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कर रही है।
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एसोसिएशन ने प्रधान न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों को संबोधित पत्र में लिखा है कि उसे मिली जानकारी के अनुसार बार के 95 फीसदी सदस्य वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई की व्यवस्था से सहज नहीं हैं।
एसोसिएशन के अनुसार प्राप्त जानकारी के अनुसार वकील वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान अपने मुकदमों को प्रभावी तरीके से पेश नहीं कर पा रहे हैं और यह वीडियो कॉन्फ्रेंस से सुनवाई के लिये सहमति देने में बहुत बड़ी बाधा है।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवाजी एम जाधव ने पत्र में कहा है, ‘‘इन व्यावहारिक दिक्कतों को ध्यान में रखते हुये मैं सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकार्ड एसोसिएशन और हजारों वकीलों की ओर से अनुरोध करता हूं कि अनलॉक-1 की घोषणा के मद्देनजर जुलाई में न्यायालय फिर से खुलने पर नियमित सुनवाई शुरू की जाये और चरणबद्ध तरीके से इसे सामान्य बनाया जाये।’’
पत्र में यह भी कहा गया है कि इस महामारी के दौरान अदालतों का काम बिखरा होने की वजह से अधिकांश वकील ‘गंभीर आर्थिक संकट’ का सामना कर रहे हैं और न्यायालय का कामकाज सामान्य तरीके से शुरू हुये बगैर यह चिंता खत्म नहीं होगी।
एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि शीर्ष अदालत मामलों की सुनवाई के लिये सीमित संख्या में वकीलों को न्यायालय कक्ष में प्रवेश की अनुमति देने जैसे सुरक्षा के उपाय करने पर विचार कर सकती है।
एसोसिएशन ने यह भी सुझाव दिया है कि फिलहाल न्यायालय कक्ष में वादकारों, इंटर्न और कानून के छात्रों का प्रवेश सीमित किया जा सकता है और न्यायाधीशों तथा वकीलों के बीच की मौजूदा दूरी बढ़ाई जा सकती है। इसी तरह, न्यायालय कक्ष के अंदर भी सभी वकीलों के लिये मास्क पहनना अनिवार्य किया जा सकता है और किसी मामले में बहस करने वाले वकीलों के लिये चेहरा ढंकने वाली शील्ड अनिवार्य की जा सकती है।
अनूप
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