यूरोप की सबसे बड़ी कंपनी एएसएमएल से टाटा की डील
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

एएसएमएल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच हुए समझौते से भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान हुए इस करार से तकनीक, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है.नीदरलैंड्स की प्रमुख तकनीकी कंपनी एएसएमएल ने शनिवार को टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ एक समझौते पर दस्तखत किए हैं, जिसके तहत भारत में सेमीकंडक्टर संयंत्र के निर्माण और विस्तार में सहयोग किया जाएगा. यह समझौता प्रधान/मंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान हुआ और इसे उनकी मौजूदगी में अंतिम रूप दिया गया.

एएसएमएल सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए अत्याधुनिक मशीनें बनाती है. कंपनी ने कहा कि वह भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात में स्थित धोलेरा संयंत्र की स्थापना और उसकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी. यह संयंत्र प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य में बनाया जा रहा है. कंपनी ने बताया कि वह इस परियोजना में अपनी अत्याधुनिक लिथोग्राफी तकनीक का इस्तेमाल करेगी. ये उपकरण हाई टेक माइक्रोचिप के तेज और बड़े पैमाने पर उत्पादन में काम आते हैं, जो कारों से लेकर मोबाइल फोन तक, कई आधुनिक उपकरणों में उपयोग किए जाते हैं.

भारत‑नीदरलैंड्स आर्थिक साझेदारी

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारत और नीदरलैंड्स ने आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक नया समझौता किया है. हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता हुआ था, जिसे यूरोपीय संघ प्रमुख उर्सुला फोन डेर लाएन ने "मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा था.

बाजार पूंजीकरण के हिसाब से यूरोप की सबसे बड़ी तकनीकी कंपनी एएसएमएल ने कहा कि उसे भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में "कई महत्वपूर्ण अवसर” दिखाई दे रहे हैं. कंपनी के सीईओ क्रिस्टोफ फूके ने एक बयान में कहा कि एएसएमएल इस क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का यह संयंत्र लगभग 11 अरब डॉलर के निवेश से विकसित किया जा रहा है. इसमें तैयार होने वाले सेमीकंडक्टर चिप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल उद्योग और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में उपयोग किए जाएंगे.

यूरोपीय संघ को भारत उन्नत तकनीक और निवेश का एक महत्वपूर्ण स्रोत मानता है, जिसका इस्तेमाल वह अपने यहां तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए करना चाहता है. दूसरी ओर, यूरोपीय संघ भारत को एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में एक बड़े बाजार के रूप में देखता है.

प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की प्रगति देश के युवाओं के लिए बड़े अवसर पैदा कर रही है. उन्होंने कहा, "यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें हम आने वाले समय में और अधिक ऊर्जा जोड़ते रहेंगे.”

निवेश और रोजगार पर जोर

नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री रोब येटेन ने कहा कि डच कंपनियां आने वाले वर्षों में भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर सकती हैं और वहां रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. उन्होंने कहा, "यह डच कंपनियों के लिए भारत में निवेश करने के लिए अवसर देता है और साथ ही भारतीय प्रतिभाओं को नीदरलैंड्स आकर्षित करने के मौका भी पैदा करता है.”

नरेंद्र मोदी 2017 में भी नीदरलैंड्स गए थे. दोनों देश आपसी व्यापार को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो पिछले साल 27.8 अरब डॉलर तक पहुंचा था.

शनिवार को मोदी ने भारतीय मूल के लोगों की एक बड़ी सभा को भी संबोधित किया और नीदरलैंड्स के राजा विल्लेम अलेक्जेंडर से मुलाकात की. अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने लीडेन विश्वविद्यालय द्वारा भारत को लौटाई जा रही प्राचीन चोल प्लेट्स का भी निरीक्षण किया, जो भारत की ऐतिहासिक विरासत हैं.

प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों के दौरे पर हैं, जिसमें वह पहले ही संयुक्त अरब अमीरात जा चुके हैं और आगे स्वीडन, नॉर्वे और इटली भी जाएंगे. यूएई में उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को "मुक्त, खुला और सुरक्षित” बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया था, जो मौजूदा अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण प्रभावित हुआ है.

मोदी रविवार को स्वीडन जाएंगे, जहां वह यूरोपीय व्यापार नेताओं के एक मंच को संबोधित करेंगे. इसके बाद वह नॉर्वे में इंडिया-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे. उनके दौरे का अंतिम चरण 19 मई को इटली में होगा, जहां वह प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात करेंगे.