चंडीगढ़, 12 सितंबर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसे उम्मीद है कि पुलिस हिरासत में होने के बावजूद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के साक्षात्कार में मदद करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक ही सीमित न होकर उच्च अधिकारियों पर भी की जाएगी।
न्यायमूर्ति अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और न्यायमूर्ति लपिता बनर्जी की खंडपीठ ने पंजाब सरकार द्वारा दलील दिये जाने के बाद यह बात कही।
राज्य सरकार ने अदालत को अवगत कराया कि मामले में अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
पंजाब पुलिस की एक विशेष जांच टीम ने जुलाई में उच्च न्यायालय को सौंपी अपनी रिपोर्ट में पाया कि बिश्नोई का साक्षात्कार तब लिया गया जब गैंगस्टर मोहाली के खरड़ में हिरासत में था जबकि दूसरा साक्षात्कार राजस्थान में लिया गया था।
यह साक्षात्कार सीआईए (अपराध जांच एजेंसी) स्टाफ के परिसर में किया गया, जो पंजाब के मोहाली के एसएएस नगर के अधिकार क्षेत्र में आता है। उच्च न्यायालय के निर्देश पर पंजाब पुलिस ने बिश्नोई के साक्षात्कारों के संबंध में दो प्राथमिकियां दर्ज कीं। ये साक्षात्कार पिछले साल एक निजी समाचार चैनल द्वारा प्रसारित किये गये थे।
बिश्नोई वर्ष 2022 में गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के आरोपियों में से एक है।
खंडपीठ जेल परिसर में कैदियों द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल से संबंधित स्वत संज्ञान लिये गये मामले की सुनवाई कर रही थी।
पंजाब के एडवोकेट जनरल (एजी) ने बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान कहा कि सीआईए स्टाफ के प्रभारी अधिकारियों के साथ-साथ पर्यवेक्षी अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
अदालत ने कहा, “हमें उम्मीद और भरोसा है कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक ही सीमित नहीं होकर बल्कि उन उच्च अधिकारियों पर भी की जाएगी, जिनके पास सीआईए स्टाफ, खरड़ पर पर्यवेक्षी क्षेत्राधिकार था। इन अधिकारियों में तत्कालीन एसएसपी (वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक) भी शामिल हैं, जो साक्षात्कार आयोजित किए जाने के समय जिला पुलिस प्रमुख थे।”
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