विदेश की खबरें | यूक्रेन युद्ध के बीच अफ्रीका की यात्रा के तहत मिस्र पहुंचे लावरोव
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

रूस के सरकारी टेलीविजन नेटवर्क ‘आरटी’ के अनुसार, लावरोव अपनी अफ्रीका यात्रा के पहले चरण में शनिवार देर रात काहिरा पहुंचे। वह इस दौरान इथियोपिया, युगांडा और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो भी जाएंगे।

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सिसी के कार्यालय ने कहा कि रूसी मुख्य राजनयिक लावरोव ने रविवार सुबह राष्ट्रपति सिसी के साथ काहिरा के राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। इसके बाद लावरोव ने मिस्र के विदेश मंत्री समेह शुकरी के साथ बातचीत की।

‘आरटी’ के अनुसार रूसी मुख्य राजनयिक का रविवार को बाद में अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल घीत से मिलने का कार्यक्रम है। वह अरब संगठन के स्थायी प्रतिनिधियों को भी संबोधित करेंगे।

यूक्रेन में रूस के युद्ध का विश्व अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ा है, जिससे तेल और गैस की कीमतें अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई हैं।

यूक्रेन गेहूं, मक्का और सूरजमुखी के तेल का दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है, लेकिन देश पर रूस के आक्रमण और इसके बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी ने खेपों को रोक दिया है। कुछ यूक्रेनी अनाज यूरोप के रास्ते से रेल, सड़क और नदी द्वारा ले जाया जाता है, लेकिन इसमें परिवहन लागत अधिक होती है।

युद्ध ने रूसी उत्पादों की खेपों को बाधित कर दिया है क्योंकि परिवहन और बीमा कंपनियां देश पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से निपटना नहीं चाहती।

अफ्रीकी देश युद्ध के प्रभावों से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। महत्वपूर्ण वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसने अफ्रीका और मध्य पूर्व के संघर्ष वाले क्षेत्रों में लाखों लोगों को भोजन और अन्य सहायता की बढ़ती कमी से प्रभावित किया है।

रूसी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर पोस्ट किए गए एक लेख में, लावरोव ने पश्चिमी देशों के इन आरोपों को खारिज किया कि रूस वैश्विक खाद्य संकट के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने इसे ‘‘दोष अन्य पर मढ़ने का एक और प्रयास’’ करार दिया।

लावरोव का यह लेख चार अन्य समाचारपत्रों में भी प्रकाशित हुआ।

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