नयी दिल्ली, 22 दिसंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को निचली अदालत के उस फैसले पर रोक लगा दी जिसमें पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह संसद की सुरक्षा में चूक के मामले के एक आरोपी को प्राथमिकी की प्रति उपलब्ध कराए।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा ने निचली अदालत के 21 दिसंबर के आदेश को चुनौती देने वाली पुलिस की याचिका पर आरोपी नीलम देवी को नोटिस जारी किया। निचली अदालत ने जांच एजेंसी को कानून के अनुसार आरोपी के वकील को प्राथमिकी की एक प्रति प्रदान करने का निर्देश दिया था।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘निचली अदालत के 21 दिसंबर के आदेश के क्रियान्वयन पर सुनवाई की अगली तारीख तक रोक लगाई जाती है। सुनवाई की अगली तारीख के लिए आरोपी को नोटिस जारी किया गया है।’’
इस मामले में अगली सुनवाई चार जनवरी, 2024 को होगी। पुलिस के वकील ने तर्क दिया कि संवेदनशील मामलों में, आरोपी को आयुक्त से संपर्क करना होगा जो प्राथमिकी की प्रति प्रदान करने के आवेदन पर निर्णय लेने के लिए एक समिति का गठन करेंगे और यदि इसे अस्वीकार कर दिया जाता है, तो वे राहत के लिए अदालत का रुख कर सकते हैं।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि निचली अदालत ने पुलिस को आरोपी को प्राथमिकी की प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश देकर गलती की है।
निचली अदालत ने बृहस्पतिवार को संसद सुरक्षा का उल्लंघन करने के मामले में गिरफ्तार चार आरोपियों मनोरंजन डी, सागर शर्मा, अमोल धनराज शिंदे और नीलम देवी की हिरासत पांच जनवरी तक बढ़ा दी थी।
नीलम के आवेदन पर निचली अदालत ने जांच अधिकारी को प्राथमिकी की एक प्रति उसके वकील को सौंपने का निर्देश दिया था।
वर्ष 2001 में 13 दिसंबर को संसद पर हुए आतंकवादी हमले की बरसी पर संसद की सुरक्षा का उल्लंघन करने के आरोप में सागर शर्मा और मनोरंजन डी को हिरासत में लिया गया है। दोनों पर शून्यकाल के दौरान लोकसभा की दर्शक दीर्घा से सदन में कूदने, ‘केन’ से पीली गैस छोड़ने और कुछ सांसदों द्वारा दबोचे जाने से पहले नारे लगाने का आरोप है।
लगभग उसी समय दो अन्य आरोपियों अमोल शिंदे और नीलम देवी ने संसद भवन परिसर के बाहर ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगाए और ‘केन’ से रंगीन गैस छोड़ी थी।
इन चार आरोपियों के अलावा पुलिस ने ललित झा और महेश कुमावत को भी इस मामले में गिरफ्तार किया है। सभी छह आरोपियों से पुलिस हिरासत में पूछताछ की जा रही है।
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