देश की खबरें | कोविड-19 टेस्ट किट, नमूनों के निस्तारण के लिए बने नियमों का सतर्कता से पालन करें : अदालत
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, सात दिसम्बर दिल्ली उच्च न्यायालय ने उम्मीद जतायी है कि कोविड-19 मरीजों के उपचार, जांच और पृथक-वास से उत्पन्न होने वाले कचरे के निस्तारण के लिए आप सरकार केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के दिशा-निर्देशों का सतर्कता से पालन करेगी।

दिल्ली सरकार के कोविड-19 टेस्ट किट और नमूनों के निस्तारण के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करने और ऐसा ना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कहने के बाद मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालन की एक पीठ ने यह बात कही।

यह भी पढ़े | Watch Video: सेना ने गलती से सीमा पार करने वाली POK की दो बहनों को सुरक्षित भेजा घर, लड़कियों ने जमकर किया बखान.

उसने इससे पहले जुलाई में सीपीसीबी द्वारा जारी किए गए कोविड-19 मरीजों के उपचार, जांच और पृथक-वास से उत्पन्न होने वाले अपशिष्टों के निस्तारण संबंधी दिशा-निर्देशों को भी रिकॉर्ड में लिया।

दिल्ली सरकार की ओर से अतिरिक्त स्थायी वकील संजय घोष और वकील नमन जैन द्वारा दिए प्रतिवेदन पर गौर करते हुए अदालत ने कहा, ‘‘ हम उम्मीद करते हैं कि प्रतिवादी (दिल्ली सरकार) द्वारा दिशा-निर्देशों और मापदंडों का सतर्कतापूर्वक पालन किया जाएगा।’’

यह भी पढ़े | ITR Filing Tips: आईटी रिटर्न 2019-20 दाखिल करने से पहले गांठ बांध लें ये जरुरी बातें.

अदालत ने इस अवलोकन के साथ याचिकाकर्ता पंकज मेहता की उस याचिका का निपटारा किया, जिसमें उन्होंने लाजपत नगर में दक्षिण-पूर्वी दिल्ली जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर ‘रैपिड एंटीजेन’ परीक्षण में इस्तेमाल किए गए नमूनों के अनुपयुक्त निस्तारण का आरोप लगाया गया था।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि जांच में इस्तेमाल किए गए नमूनों को खुलेआम फेंका जा रहा है और जब उन्होंने बड़े पैमाने पर संक्रमण के खतरे की शिकायत की तब संबंधित डॉक्टर ने कहा कि ये नमूने उन लोगों के हैं, जो संक्रमित नहीं पाए गए हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)