राष्ट्रीय कोविड-19 कार्यबल के प्रवक्ता अचमद यूरियांतो ने कहा कि देश में जांच की क्षमता बढ़ने के साथ मामले बढ रहे हैं जिसे पिछले हफ्ते तक सरकार ने 20 हजार नमूनों की रोजाना जांच का लक्ष्य रखा था।बता दें कि इंडोनेशिया दुनिया का पांचवा सबसे आबादी वाला देश है।
हालांकि, इस दक्षिण पूर्व एशियाई देश में संक्रमण के वास्तविक स्तर का पता लगाने के लिए सरकार द्वारा जांच करने की क्षमता को लेकर आशंका बनी हुई है जहां पर करीब 27 करोड़ आबादी निवास करती है।
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कार्यबल ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर तक इंडोनेशिया में 50,187 लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है और 2,620 लोगों की मौत हुई है जो दक्षिणपूर्वी एशियाई किसी देश में सबसे अधिक है जबकि मार्च के शुरुआत में केवल दो मामले सामने आए थे।
कार्यबल ने बताया कि 20,449 मरीज ठीक हो चुके हैं।
एयरलंग्गा विश्वविद्यालय के महामारी विशेषज्ञ लावरा नाविका यामिनी ने बताया कि सरकार के हालिया आंकड़ों के मुताबिक देश में कोरोना वायरस से संक्रमण का पहला मामला आने के बाद से अबतक 4,30,000 से अधिक लोगों की जांच की गई है जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की अनुशंसा से बहुत कम है क्योंकि विश्व संगठन के मुताबिक देश की आबादी के अनुपात में एक से डेढ़ प्रतिशत जांच होनी चाहिए।
यामिनी ने कहा, ‘‘ महामारी को रोकने के उपायों के संदर्भ में इंडोनेशिया की स्थिति सुरक्षित नहीं है।पर्याप्त जांच के बिना कोविड-19 के वास्तविक प्रयास का अंदाजा लगाना संभव नहीं है।’’
इंडोनेशिया के योजना मंत्री सुहारसो मोनोरफा ने हाल में संसद की सुनवाई के दौरान बताया कि महामारी की वजह से 55 लाख इंडोनेशियाई अपनी नौकरी गंवा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि पहले ही देश की 9.4 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है और यह 10.2 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
राष्ट्रपति जोको विडोडो ने कहा कि उनका प्रशासन इंडोनेशिया की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना चाहता है लेकिन वायरस से सुरक्षित भी रखना चाहता है। इसलिए इस महीने के शुरुआत से अर्थव्यवस्था को खोलने की प्रक्रिया शुरू की गई।
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