देश की खबरें | कोविड-19 प्रबंधन हमारा विशेषाधिकार नहीं : निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय से कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मद्रास उच्च न्यायालय की हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के संबंध में आईं कड़ी टिप्पणियों से व्यथित निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय से सोमवार को कहा कि कोविड-19 प्रबंधन उसका विशेषाधिकार नहीं है और राज्य का शासन उसके हाथों में नहीं है।
नयी दिल्ली, तीन मई मद्रास उच्च न्यायालय की हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के संबंध में आईं कड़ी टिप्पणियों से व्यथित निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय से सोमवार को कहा कि कोविड-19 प्रबंधन उसका विशेषाधिकार नहीं है और राज्य का शासन उसके हाथों में नहीं है।
निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ से कहा कि संवैधानिक इकाई के खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा की गई हत्या के आरोपों संबंधी टिप्पणी अवांछनीय है तथा इस तरह की निष्कर्षात्मक टिप्पणियां चुनाव इकाई को सुने बिना नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य का शासन निर्वाचन आयोग के हाथों में नहीं है। हम केवल दिशा-निर्देश जारी करते हैं। रैली में शामिल लोगों को रोकने के लिए हमारे पास सीआरपीएफ या कोई अन्य बल नहीं है। लोगों की संख्या सीमित करने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को आदेश जारी करना होता है। ऐसी अवधारणा है कि निर्वाचन आयोग के पास इस सबकी जिम्मेदारी है। कोविड प्रबंधन से हमारा कोई लेना-देना नहीं है।’’
उच्च न्यायालय ने महामारी की दूसरी लहर के दौरान मामलों में भयावह वृद्धि को लेकर 26 अप्रैल को निर्वाचन आयोग की निन्दा की थी और कोरोना वायरस के प्रसार के लिए इसे ‘‘अकेले जिम्मेदार’’ ठहराया था।
इसने यहां तक कहा था कि निर्वाचन आयोग सर्वाधिक गैर-जिम्मेदार संस्थान है तथा इसके अधिकारियों के खिलाफ हत्या के आरोप में भी मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
उच्चतम न्यायालय की पीठ ने द्विवेदी से कहा कि चुनाव इकाई को उच्च न्यायालय की टिप्पणी को सही भावना से लेना चाहिए।
इसने कहा, ‘‘कोई किसी की आलोचना नहीं कर रहा है। आपने अच्छा काम किया है। निर्वाचन आयोग एक अनुभवी संवैधानिक इकाई है, जिसके पास देश में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने का दायित्व है। इसे की गईं टिप्पणियों से व्यथित नहीं होना चाहिए।’’
पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय की टिप्पणी का मतलब किसी संवैधानिक इकाई की ‘‘आलोचना करने’’ से नहीं था, लेकिन हो सकता है कि यह चर्चा के प्रवाह में ‘‘क्षणिक रूप से’’ कर दी गई हो और इसीलिए यह न्यायिक आदेश में नहीं है।
द्विवेदी ने कहा कि निर्वाचन आयोग चर्चा या उच्च न्यायालयों द्वारा की जा रहीं टिप्पणियों पर आपत्ति नहीं जता रहा, लेकिन ये संबंधित मामले के संदर्भ में होनी चाहिए और कोई तल्ख टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में मतदान छह अप्रैल को हुआ था और जनहित याचिका 19 अप्रैल को दायर की गई तथा उच्च न्यायालय ने आदेश 26 अप्रैल को दिया।
पीठ ने कहा, ‘‘कुछ टिप्पणियां व्यापक जनहित में की जाती हैं। कई बार यह नाराजगी होती है और कई बार ये व्यक्ति को काम करने की बात कहने के लिए की जाती हैं, उसे ऐसा करने की जरूरत होती है...कुछ न्यायाधीश अल्पभाषी होते हैं और कुछ न्यायाधीश अधिक बोलते हैं।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग के इस अभिवेदन को संज्ञान में लिया जाएगा कि मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा उसके खिलाफ लगाए गए ‘‘तीखे आरोप’’ अवांछनीय हैं और संवैधानिक इकाइयों के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश की जाएगी।
पीठ ने स्पष्ट किया कि वह कार्यवाही के दौरान जनहित में की गईं मौखिक टिप्पणियों की रिपोर्टिंग करने से न तो मीडिया को रोकेगी और न ही उच्च न्यायालयों ‘‘लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ’’ से यह कहकर उनका मनोबल गिराएगी कि वे सवाल उठाते समय संयम बरतें।
इसने चुनाव इकाई के इस आग्रह को ‘‘अत्यंत अवास्तविक’’ करार दिया कि मीडिया को अदालत की कार्यवाही के दौरान की गईं टिप्पणियों की रिपोर्टिंग करने से रोका जाए।
शीर्ष अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया और कहा कि वह तर्कसंगत आदेश देगी क्योंकि मद्रास उच्च न्यायालय के खिलाफ निर्वाचन आयोग की याचिका में बड़ा मुद्दा उठाया गया है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on May 03, 2021 07:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

