जरुरी जानकारी | कोविड-19 प्रभाव: कुछ क्षेत्रों में कर्ज पुनर्गठन की छूट  दे सकता है रिजर्व बैंक

नयी दिल्ली, 29 जून रिजर्व बैंक ने कोविड- 19 महामारी की वजह से बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों के लिये कर्ज के एक बारगी पुनर्गठन की दिशा में पहल शुरू कर दी है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

भारतीय बैंक संघ (आईबीए) और कई अन्य संगठनों ने रिजर्व बैंक के साथ साथ सरकार को भी इस संबंध में ज्ञापन दिये हैं। इन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से कारोबार में जबर्दस्त उथल पुथल के कारण कर्ज का एक बारगी पुनर्गठन किया जाना चाहिये।

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सूत्रों ने बताया कि केन्द्रीय बैंक ने इन सभी सुझावों पर गौर किया है और सिफारिशों की जांच पड़ताल हो रही है। इसके आधार पर ही उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां पुराने कर्ज की किस्तों के पुनर्गठन की छूट दी जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार अगस्तके अंत तक इस इस विषय में कुछ ठोस बात तय हो सकती है। अगस्त में कर्ज की किस्त चुकाने को दी गयी छह माह की मोहलत खत्म हो रही है।

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इस लिहाज से जिन क्षेत्रों के बीच कर्ज के पुनर्गठन को लेकर गौर किया जा सकता है उनमें आतिथ्य, पर्यटन, विमानन और निर्माण क्षेत्र प्रमुख हैं।

रिजर्व बैंक ने इससे पहले फरवरी में जीएसटी पंजीकृत सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के संकटग्रस्त ऋणों के एकबारगी पुनर्गठन का लाभ देने का फैसला किया था। यह सुविधा ऐसे एमएसएमई को दी गई जो कि एक जनवरी 2020 को ‘डिफाल्ट’ थे। रिजर्व बैंक ने यह सुविधा बजट घोषणा के अनुरूप उपलब्ध कराई थी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषणा में कहा था, ‘‘रिजर्व बैंक द्वारा पिछले साल रिण के पुनर्गठन की अनुमति देने से पांच लाख से अधिक एमएसएमई को फायदा हुआ। यह पुनर्गठन सुविधा 31 मार्च 2020 को समाप्त होनी है। सरकार ने रिजर्व बैंक से इस सुविधा को 31 मार्च 2021 तक बढ़ाने को लेकर विचार करने को कहा है।’’

गत सपताह वित्त मंत्री ने कहा कि दबाव वाली कंपनियों की मदद के लिये रिण के एकबारगी पुनर्गठन को लेकर सरकार रिजर्व बैंक के साथ बातचीत कर रही है।

इससे पहले वर्ष 2008 में लेहमन ब्रादर्स के दिवालिया होने के बाद दुनियाभर में वित्तीय संकट खड़ा होने पर भी रिजर्व बैंक ने कई क्षेत्रों के लिये एकबारगी रिण पुनर्गठन की घोषणा की थी ताकि वह आर्थिक संकट से उबर सकें। हालांकि, इस सुविधा का कई कार्पोरेट कर्जदारों, बैंकों ने दुरुपयोग किया और रिजर्व बेंक को 2015 में इसके नियमों को सख्त करना पड़ा। इसके बाद रिजर्व बैंक ने दिसंबर 2015 में संपत्ति गुणवत्ता की समीक्षा करना भी शुरू कर दिया। इससे कर्ज खातों को हर समय मानक दर्जे का बनाये रखने और प्रावधान से बचने की सुविधा देते रहने की धारणा हमेशा के लिये समाप्त कर दी गई।

इसके बाद कर्ज किस्त के भुगतान में तय समय से एक दिन की भी देरी होने पर खाते को डिफाल्ट माने जाने का नियम शुरू हो गया और ऐसे मामलों को दिवालिया एवं रिण शोधन अक्षमता कानून के तहत समाधान के लिये भेज दिया जाता है।

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