देश की खबरें | कोविड-19: न्यायालय ने धर्म के आधार पर लोगों की पहचान करने के खिलाफ याचिका खारिज की
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 25 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 से संबंधित जानकारी के संबंध में लोगों की जाति, धर्म, और समुदाय के आधार पर पहचान नहीं करने का सरकार और अन्य प्राधिकारियों को निर्देश देने के लिये दायर याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया। याचिका में प्राधिकारियों को जाति, धर्म, समुदाय, धार्मिक पहचान या सांप्रदायिक वर्गीकरण के आधार पर कोरोना वायरस या दूसरी महामारी की जानकारी को साझा करने से रोकने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया था।

यह भी पढ़े | Bihar Elections Model Code of Conduct: बिहार में आदर्श आचार संहिता लागू, अब नेताओं पर EC रखेगी पैनी नजर- जानें पूरा नियम.

यह याचिका दिल्ली के दो निवासियों ने दायर की थी और इसमें प्राधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि इस तरह की जानकारी एकत्र करने और उसके प्रसार में मदद करने वाले लोगों, संगठनों, वेबसाइटों या मीडिया घरानों को चिन्हित किया जाए।

याचिका में कहा गया है कि संबंधित प्राधिकारियों को इस तरह की वेबसाइट तत्काल ब्लाक करने के साथ ही आहत करने वाली ऐसी सामग्री इंटरनेट से तुरंत हटानी चाहिए।

यह भी पढ़े | Farmers Bill 2020: AIKS अध्यक्ष अशोक धावले के नेतृत्व में महाराष्ट्र में कृषि बिलों को लेकर हजारों की तादात में किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी.

याचिका में इस साल मार्च में आयोजित तबलीगी जमात मरकज का जिक्र करते हुये कहा है कि इस तरह की घटनायें मीडिया के एक वर्ग में राष्ट्रीय सुर्खियां बनीं थी क्योंकि संयम बरतने के बजाये इसे सांप्रदायिक रंग देते हुये पेश किया गया था।

याचिका में कहा गया है कि सांप्रदायिक नफरत फैलाने और सार्वजनिक व्यवस्था में समस्या पैदा करने वाले तत्वों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

याचिका में कहा गया था कि निजामुद्दीन पश्चिम में तबलीगी जमात के मुख्यालय में हुये धार्मिक आयोजन के दौरान हुयी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद समूचे मुस्लिम समुदाय पर ही दोषारोपण किया जाने लगा था।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)