नयी दिल्ली, 24 अगस्त केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन ने जमानत के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। कप्पन को अक्टूबर, 2020 में उत्तर प्रदेश के हाथरस जाते समय रास्ते में उस समय गिरफ्तार किया गया था जब वह कथित सामूहिक बलात्कार की शिकार दलित महिला के गांव जा रहे थे।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने इस महीने की शुरुआत में कप्पन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कप्पन के खिलाफ हाथरस में कथित साजिश मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) (यूएपीए) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए बुधवार को याचिका का उल्लेख किया गया। पीठ 26 अगस्त को याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमत हुई।
अधिवक्ता हरीश बीरन ने न्यायमूर्ति रमण, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सी. टी. रविकुमार की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया और कहा कि उच्च न्यायालय ने कप्पन को जमानत देने से इनकार कर दिया है।
याचिका में कहा गया है, ‘‘वर्तमान में, याचिकाकर्ता ने कथित आरोपों के आधार पर लगभग दो साल जेल में बिताए हैं और वह भी केवल इसलिए कि वह हाथरस बलात्कार / हत्या मामले में रिपोर्टिंग के अपने पेशेवर कर्तव्य का निर्वहन करना चाहते थे।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘इसलिए, इस याचिका में स्वतंत्रता के अधिकार के साथ-साथ संविधान के तहत स्वतंत्र मीडिया में निहित अभिव्यक्ति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित मौलिक प्रश्न उठाये गये हैं।’’
याचिका में दावा किया गया है, ‘‘उच्च न्यायालय का यह निष्कर्ष कि याचिकाकर्ता को हाथरस में कोई काम नहीं था, पूरी तरह से निराधार है।’’
गौरतलब है कि कप्पन को अक्टूबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था, जब वह हाथरस जा रहे थे।
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से कथित संबंध रखने वाले चार लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और यूएपीए के विभिन्न प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पीएफआई पर पहले भी देशभर में संशोधित नागरिकता अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के लिए वित्तपोषण करने का आरोप लगा था।
पुलिस ने पहले दावा किया था कि आरोपी हाथरस में कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे।
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