देश की खबरें | केरल की अदालत ने सबूतों के अभाव में नन समेत पांच लोगों को 'तस्करी' मामले में बरी किया

त्रिशूर (केरल), 30 जुलाई केरल की एक अदालत ने घरेलू काम के लिए तीन नाबालिग लड़कियों की तस्करी के आरोप से जुड़े एक मामले में दो नन समेत पांच लोगों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि धमकी, जबरदस्ती या शोषण का कोई सबूत नहीं मिला।

त्रिशूर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के कामनीस की अदालत ने 26 जुलाई के आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 370 के तहत प्रथम दृष्टया मामला साबित करने में सफल नहीं हुआ। यह धारा मानव तस्करी से संबंधित है।

आदेश में कहा गया है, “धमकी, धोखाधड़ी, छल या दासता जैसी प्रथाओं का कोई सबूत नहीं मिला। पीड़िताओं ने यह भी बताया कि उनकी यात्रा के बदले कोई राशि नहीं ली गई।”

अदालत ने कहा, "ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि लड़कियों को किसी प्रकार की धमकी देकर ले जाया गया था। अपहरण या धोखाधड़ी या दुर्व्यवहार या जोर जबरदस्ती का कोई मामला नहीं बनता है। मुख्य आरोप यह है कि किसी प्रकार का दबाव या प्रलोभन दिया गया।’’

आदेश में कहा गया है, "यह देखा जाना चाहिए कि पीड़िताओं सहित किसी भी गवाह ने ऐसा नहीं कहा है। पीड़िताओं का कहना है कि कोई राशि प्राप्त नहीं हुई थी। इस आशय का भी कोई दावा नहीं किया गया कि गुलामी या दासता जैसा कोई प्रयास किया गया।"

रेलवे पुलिस ने 2022 में मामला दर्ज किया था, जिसमें पांच लोगों पर "समान इरादे" से लड़कियों को झारखंड से केरल "विभिन्न कॉन्वेंट में घरेलू सहायिका के रूप में काम करने के उद्देश्य से" ले जाने का आरोप लगाया गया था।

‘चाइल्डलाइन’ के सदस्यों ने 15 से 18 वर्ष की आयु की इन लड़कियों को त्रिशूर रेलवे स्टेशन पर रोका। अदालत ने कहा कि लड़कियां "अपने माता-पिता की सहमति से और "बेहतर जीवन" की तलाश में यात्रा कर रही थीं और "वहां किसी भी तरह का जबरन श्रम कराने का आरोप भी नहीं था।"

सभी पांच आरोपियों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 227 के तहत बरी कर दिया गया। इनमें से तीन झारखंड की मूल निवासी हैं और अंबाकाड स्थित सेंट जोसेफ कॉन्वेंट और पूमाला स्थित फातिमा कॉन्वेंट की मदर सुपीरियर्स (कॉन्वेंट की प्रमुख) हैं।

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