नयी दिल्ली, 28 जून केरल के बाल अधिकार संगठन ने उच्चतम न्यायालय का रुख कर बच्चों पर कुत्तों के हमलों की समस्या से प्रभावी रूप से निपटने के लिए आवारा कुत्तों को किसी जगह बंद रखने की सुविधा उपलब्ध कराने या उन्हें मारने जैसे उपाय करने के संबंध में ‘‘तत्काल निर्देश’’ देने का अनुरोध किया है।
केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (केएससीपीसीआर) ने उच्चतम न्यायालय से आवारा कुत्तों की समस्या पर राज्य द्वारा दायर 2019 के एक लंबित मामले में उसे पक्षकार बनाए जाने का निर्देश देने का अनुरोध भी किया है।
राज्य में कुत्तों के हमलों के मामले में आंकड़ें उपलब्ध कराने वाले बाल अधिकार संगठन ने कहा, ‘‘आवारा कुत्ते लोगों या अन्य पशुओं पर हमला कर जन सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। उन्हें बंद रखने की जगह मुहैया कराकर या आवारा कुत्तों का वध कर ऐसी घटनाओं के खतरे को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।’’
उसने कहा कि दुनियाभर में कुत्तों के काटने से होने वाले रेबीज से हर साल अनुमानित 59,000 लोगों की मौत होती है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, रेबीज के कारण दुनियाभर में होने वाली 36 प्रतिशत मौतें भारत में होती हैं।
उसने बताया कि केरल में 2019 में आवारा कुत्तों के हमलों की 5,794 घटनाएं दर्ज की गयी और 2020 में यह संख्या कम होकर 3,951 हो गयी। राज्य में 2021 में कुत्तों के हमले की 7,927 मामले दर्ज किए गए जबकि 2022 में 11,776 और 19 जून 2023 तक 6,276 मामले दर्ज किए गए हैं।
केएससीपीसीआर ने कहा, ‘‘हाल ही में 11 जून 2023 को कन्नूर में एक दुखद घटना में ऑटिज्म से पीड़ित निहाल नाम के 11 वर्षीय लड़के को आवारा कुत्तों के झुंड ने नोंच-नोंचकर मार डाला।’’
ऐसे मामलों पर न्यायिक हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए उसने कहा, ‘‘आवारा कुत्तों में रेबीज जैसी बीमारियां हो सकती है जो मनुष्यों में फैल सकती है। आवारा कुत्तों को किसी जगह पर बंद रखने की सुविधा उपलब्ध कराने से ऐसी बीमारी के प्रसार को रोकने में मदद मिल सकती है। आवारा कुत्ते भौंक कर, लोगों पर हमला कर, संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर और लोगों तथा खासतौर से बच्चों के बीच डर पैदा कर उत्पात मचाते हैं।’’
उच्चतम न्यायालय ने 21 जून को केरल सरकार से उस याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा था जिसमें राज्य के कन्नूर जिले में ‘संदिग्ध पागल’ और ‘बेहद खतरनाक’ आवारा कुत्तों को मारने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है।
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