नयी दिल्ली, 29 अप्रैल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रमुख बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ यहां जंतर मंतर पर धरना दे रहे पहलवानों से शनिवार को मुलाकात की और कहा कि जो भारतीय अपने देश को प्यार करते उन्हें पहलवानों के संघर्ष में उनके साथ खड़ा होना चाहिए।
कई महिला खिलाड़ियों ने सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पहलवान यहां करीब एक हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं। सिंह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद हैं और दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को उनके खिलाफ दो प्राथमिकियां दर्ज की हैं।
पहलवानों को अपना समर्थन देते हुए केजरीवाल ने कहा जो महिलाओं के साथ ऐसा गलत काम करते हैं, उन्हें “ फांसी दे दी चाहिए।”
केजरीवाल ने बाद में ट्विटर पर कहा, “ पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन करने वाली ये सभी महिला खिलाड़ी हमारी बेटियां हैं, इन्हें इंसाफ़ मिलना ही चाहिए। आरोपी चाहे जितना भी शक्तिशाली हो, उसे सख़्त से सख़्त सज़ा मिलनी चाहिए।”
धरना स्थल पर अपने संबोधन में केजरीवाल ने देश भर के लोगों से छुट्टी लेकर जंतर-मंतर आकर पहलवानों का समर्थन करने को भी कहा।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदर्शन स्थल पर बिजली और पानी की आपूर्ति काट दी गई है तथा भोजन की आपूर्ति नहीं होने दी जा रही है तथा गद्दों को लाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने अपनी ओर से पहलवानों की मदद करने का वादा किया।
केजरीवाल ने कहा कि पुरस्कार विजेता खिलाड़ियों समेत प्रदर्शनकारी पहलवानों ने देश का नाम रोशन किया है, इसके बावजूद उन्हें प्रदर्शन करना पड़ा और सिंह के खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख करना पड़ा।
किसी का नाम लिए बिना केजरीवाल ने कहा कि ‘एक पार्टी’ के नेताओं का कुछ नहीं बिगड़ता है, भले ही वे कुछ भी गलत कर लें और यहां यही हो रहा है।
केजरीवाल ने पहलवानों को उनके संघर्ष के लिए सलाम किया और कहा कि जो लोग अपने देश से प्यार करते हैं उन्हें उनके साथ खड़ा होना चाहिए।
दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की उच्चतम न्यायालय की पीठ को बताया कि प्राथमिकी शुक्रवार को दर्ज की जाएगी जिसके घंटों के बाद पुलिस ने सिंह के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की।
पहली प्राथमिकी एक नाबालिग द्वारा लगाए गए आरोपों से संबंधित है, जिसके तहत यौन अपराधों से बाल संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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