ताजा खबरें | कश्मीर विधेयक चर्चा दो अंतिम लोस

उन्होंने कश्मीर से संबंधित हरेक फैसले में देश के प्रथम गृह मंत्री वल्लभ भाई पटेल के शामिल होने का दावा किया।

वाईएसआर कांग्रेस की चिंता अनुराधा ने शासन के हर क्षेत्र में लैंगिक अंतर को पाटने के प्रयास की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढावा देने के लिए जागरूकता की जरूरत है।

शिवसेना के कृपाल बालाजी तुमाने ने विधेयक का समर्थन करते हुए उम्मीद जताई कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर भारत का कब्जा होगा।

उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद जम्मू कश्मीर ही नहीं, बल्कि लद्दाख भी देश की मुख्यधारा में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को समाप्त किये जाने के बाद जम्मू कश्मीर में 90 हजार करोड़ रुपये का निवेश आया है और पत्थर लेकर लाल चौक पर खड़े होने वाले युवाओं के हाथों में अब रोजगार आ रहा है।

जनता दल (यूनाइटेड) के कौशलेन्द्र कुमार ने बिहार की तरह ही जम्मू कश्मीर में भी नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थानों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण देने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में कश्मीरी पंडितों की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है और आतंकवादी घटनाएं भी जारी हैं, इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

बीजू जनता दल के सांसद भर्तृहरि महताब ने कहा कि महिलाओं का सशक्तीकरण देश के विकास के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन में भी महिलाओं की भागीदारी थी।

उन्होंने कहा, ‘‘पीओके की बात करते वक्त गिलगिट और बाल्टिस्तान को हम भूल जाते हैं। हमें इस बारे में भी बात करनी चाहिए।’’

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के मलूक नागर ने विधेयक का समर्थन किया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले ने जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव की योजना के बारे में पूछा? उन्होंने पूछा कि इसे राज्य का दर्जा कब मिलेगा।

शिवसेना के अरविंद सावंत ने भी विधेयक का समर्थन किया। हालांकि, उन्होंने जम्मू कश्मीर में अगले साल सितम्बर से पहले चुनाव कराने की मांग की।

कांग्रेस के सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि पंजाब और कश्मीर के हालात समान हैं। उन्होंने कहा कि वहां की बहु-बेटियों को सुरक्षा देनी होगी।

हसनैन मसूदी ने कहा, ‘‘जहां तक इस विधेयक की विषयवस्तु की बात है तो हम इसके साथ हैं क्योंकि हम महिलाओं को हक के पक्ष में हैं।’’

उन्होंने कहा कि सरकार ने वादा किया था कि जम्मू कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे को बहाल किया जाएगा, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ।

मसूदी ने कहा कि यह विधेयक जम्मू कश्मीर की विधानसभा में आना चाहिए था, लेकिन केंद्रशासित प्रदेश के हवाले से यहां लाया जा रहा है।

उन्होंने राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों को नजरबंद किये जाने की खबरों का उल्लेख किया, जिस पर गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि जम्मू कश्मीर में कोई नजरबंद नहीं है।

भाजपा की जसकौर मीणा ने आरोप लगाया कि मसूदी की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू कश्मीर का दोहन किया, लेकिन उसकी जनता के साथ अन्याय किया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 नहीं हटाया होता तो महिला आरक्षण की बात भी मूर्त रूप नहीं लेती।

आरएसपी के एन.के. प्रेमचंद्रन ने विधेयक का समर्थन करते हुए सरकार से पूछा कि जब महिला आरक्षण विधेयक को पारित किया था तभी उसमें ही जम्मू कश्मीर और पुडुचेरी में एक तिहाई महिलाओं को आरक्षण के संबंध में प्रावधान को शामिल क्यों नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि बार-बार विधेयक लाना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छी बात नहीं है।

प्रेमचंद्रन ने यह दावा भी किया कि कश्मीर को लेकर फैसले प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और तत्कालीन गृहमंत्री पटेल ने सामूहिक रूप से लिये थे और इतिहास को बदलने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

इस पर भाजपा के निशिकांत दुबे ने कहा कि नेहरू और पटेल में कश्मीर को लेकर मतभेद था, इस बात के प्रमाण हैं।

उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस सौगत राय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी के कश्मीर के लिए योगदान को खारिज करते हैं, लेकिन उन्हें अपने ही बड़े भाई भाजपा नेता तथागत राय की मुखर्जी पर लिखी किताब पढ़नी चाहिए।

उन्होंने कहा कि 1956 में राज्य पुनर्गठन कानून था और तब नेहरू प्रधानमंत्री थे। दुबे ने कहा कि तब कहा गया था कि किसी भी राज्य को संप्रभु शक्ति नहीं है और केंद्र को अलग राज्य बनाने, राज्यों को विभाजित करने का पूरा अधिकार है।

लद्दाख से भाजपा सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल

ने कहा कि उनके केंद्रशासित क्षेत्र में महिला सशक्तीकरण के लिए विभिन्न योजनाएं चल रही हैं।

चर्चा में जद(यू) के आलोक कुमार सुमन और माकपा के ए.एम. आरिफ ने भी भाग लिया।

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