बेंगलुरु/बेलगावी, 15 अप्रैल केंद्रीय मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने कर्नाटक मंत्रिमंडल के समक्ष पेश की गई सामाजिक-आर्थिक और शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट की आलोचना करते हुए मंगलवार को सवाल किया कि यह जाति आधारित गणना है या नफरत की गणना? उन्होंने राज्य सरकार से कर्नाटक में वोक्कालिगा समुदाय की वास्तविक आबादी बताने की मांग भी की।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पर आरोप लगाया कि वह ‘जाति आधारित गणना’ के जरिये समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। विजयेंद्र ने दावा किया कि ‘जाति आधारित गणना’ का उद्देश्य सिद्धरमैया के “राजनीतिक हितों” की रक्षा करना है और अब समय आ गया है कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दें।
इस बीच, राज्य के प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय के शीर्ष संगठन ‘वोक्कालिगा संगठन’ ने इस रिपोर्ट के खिलाफ आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई।
इसके अध्यक्ष केंचप्पा गौड़ा और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि वोक्कालिगा समुदाय वीरशैव-लिंगायत, ब्राह्मणों जैसे अन्य समुदायों के साथ एकजुट होगा तथा अगर सरकार जाति आधारित गणना रिपोर्ट को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ती है तो वे मिलकर बड़े पैमाने पर आंदोलन की योजना बनाएंगे।
कर्नाटक मंत्रिमंडल 17 अप्रैल को इस रिपोर्ट पर चर्चा करेगा।
केंद्रीय इस्पात और भारी उद्योग मंत्री कुमारस्वामी ने एक बयान जारी कर पूछा कि कर्नाटक में प्रमुख कृषक समुदाय वोक्कालिगा की वास्तविक आबादी कितनी है। कुमारस्वामी खुद इस समुदाय से आते हैं।
उन्होंने कहा, “यह वास्तव में क्या है, जाति आधारित गणना है या नफरत की गणना? क्या यह तथाकथित गणना राज्य में जानबूझकर अशांति भड़काने के लिए रची गई साजिश है? या यह केवल लगातार बढ़ती महंगाई और घोटालों से होने वाली शर्मिंदगी से ध्यान भटकाने की एक चाल है?”
कुमारस्वामी ने कहा, “ऐसा न हो कि इससे पूरा राज्य जातिगत विभाजन की आग में झुलसने लगे। क्या कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का यह कदम कुछ समुदायों को राजनीतिक और सामाजिक रूप से हाशिये पर धकेलने का एक पूर्व नियोजित प्रयास है?”
लीक हुई सामाजिक-आर्थिक और शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट पर चिंता जताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस रिपोर्ट के “तथाकथित आंकड़ों” पर अब हर जगह चर्चा हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी अज्ञात स्रोत ने इन आंकड़ों को सुनियोजित तरीके से सार्वजनिक मंच पर लीक किया है।
कुमारस्वामी ने पुराने मैसूर क्षेत्र जैसे मांड्या, कोलार, चिक्काबल्लापुर, रामनगर, बेंगलुरु ग्रामीण, तुमकुरु और चित्रदुर्ग में रहने वाले वोक्कालिगा समुदाय की वास्तविक आबादी बताने की मांग की।
उन्होंने जातिवार गणना पर अपना रुख बदलने के लिए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की आलोचना भी की और दावा किया कि शिवकुमार ने पहले इस कवायद का विरोध किया था।
कुमारस्वामी ने कहा, “मुख्यमंत्री की कुर्सी की चाह में रातों की नींद गंवाने वाले शिवकुमार ने एक बार समुदाय से विनती की थी कि ‘मुझे बस एक बार कलम और कागज दे दो!’ और अब क्या वही व्यक्ति सिर झुकाकर ‘सिद्ध’ षड्यंत्र रिपोर्ट का समर्थन कर रहा है?”
सिद्ध से उनका अभिप्राय मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के बारे में था।
कुमारस्वामी ने कहा, “मैं इस रिपोर्ट का समर्थन नहीं करता। मैं इस अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं।”
वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजयेंद्र ने सिद्धरमैया पर ‘जाति आधारित गणना’ के जरिये समाज को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
उन्होंने बेलगावी में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “भाजपा पिछड़े और वंचित वर्गों के आर्थिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक उत्थान तथा उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन सिद्धरमैया ने इस मुद्दे का इस्तेमाल करके अपनी राजनीतिक जड़ें मजबूत करने की कोशिश की। अगर सिद्धरमैया को न्याय की इतनी ही चिंता थी, तो उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान इस सर्वेक्षण को लागू क्यों नहीं किया?”
उन्होंने कहा, “बाद में जब कांग्रेस-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन की सरकार बनी, तो सिद्धरमैया समन्वय समिति के प्रमुख थे। उन्होंने उस समय जातिवार गणना क्यों नहीं करवाई? यही नहीं, मौजूदा सरकार को भी सत्ता में आए बीस महीने बीत चुके हैं।”
विजयेंद्र ने आरोप लगाया, “सिद्धरमैया को यह मुद्दा अब याद आ रहा है, क्योंकि उनके इस्तीफे का समय नजदीक आ रहा है। उन्हें किसी और के लिए मुख्यमंत्री पद खाली करना पड़ सकता है। किसी को भी यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि मुख्यमंत्री को इस मामले में वाकई चिंता है।”
कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट 11 अप्रैल को मंत्रिमंडल के समक्ष रखी गई थी। 17 अप्रैल को होने वाली विशेष कैबिनेट बैठक में इस पर चर्चा की जाएगी।
सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार (2013-2018) ने 2015 में यह सर्वेक्षण कराया था।
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को उसके तत्कालीन अध्यक्ष एच कंथाराजू के नेतृत्व में यह रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा गया था।
सर्वेक्षण का काम 2018 में पूरा हुआ था, जब मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धरमैया का पहला कार्यकाल समाप्त हो रहा था। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में कंथाराजू की जगह लेने वाले जयप्रकाश हेगड़े ने फरवरी 2024 में रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया।
विजयेंद्र ने दावा किया कि इस जाति आधारित गणना रिपोर्ट को लागू करना संभव नहीं है और यह सरकार ऐसा नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट पुरानी हो चुकी है, क्योंकि सर्वेक्षण को हुए 10 साल बीते चुके हैं।
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