देश की खबरें | कर्नाटक: रोजगार आरक्षण विधेयक को ठंडे बस्ते में डालने के मुद्दे पर भाजपा ने कांग्रेस सरकार को घेरा

बेंगलुरु, 18 जुलाई कर्नाटक में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बृहस्पतिवार को राज्य की कांग्रेस सरकार को आगाह किया कि अगर निजी क्षेत्र में कन्नड़ लोगों के लिए आरक्षण लागू करने संबंधी विधेयक को चालू विधानसभा सत्र में पेश नहीं किया गया तो उसे लोगों के गुस्से का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।

कर्नाटक राज्य उद्योग, कारखानों और अन्य प्रतिष्ठानों में स्थानीय लोगों के आरक्षण लागू करने के खातिर रोजगार विधेयक, 2024 को ठंडे बस्ते में डालने के लिए भाजपा ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पर निशाना साधा। इस विधेयक को सोमवार को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई थी लेकिन उद्योग जगत के विरोध के बाद बुधवार इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

इस निर्णय पर स्पष्टीकरण देते हुए सिद्धरमैया ने बुधवार को कहा कि निजी क्षेत्र की कंपनियों, उद्योगों और उद्यमों में कन्नड़ लोगों के लिए आरक्षण लागू करने का विधेयक अभी तैयारी के चरण में है।

उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल की अगली बैठक में व्यापक चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट कर सवाल उठाए, ‘‘आप कन्नड़ लोगों को रोजगार देने के लिए विधेयक क्यों लाए? आपने इसे वापस क्यों लिया? कन्नड़ लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ क्यों किया? क्या आपको अपमान करने के लिए कन्नड़ के लोग ही मिले हैं?’’

शिकारीपुरा के विधायक ने कहा, ‘‘सरकार कन्नड़ लोगों के लिए रोजगार में आरक्षण लागू करने वाला विधेयक पेश करे, अन्यथा कन्नड़ लोगों के गुस्से का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।’’

विजयेंद्र ने विधेयक को ठंडे बस्ते में डालने के ‘कायरतापूर्ण निर्णय’ की निंदा की।

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि देश और कन्नड़ लोगों के आत्मसम्मान को कुचलने वाली कर्नाटक विरोधी ताकतों के गुट मुख्यमंत्री पर हावी हो गए हैं, जिसके कारण उन्हें एक दिन में तीन बार ‘यू-टर्न’ लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष ने कहा, ‘‘विपक्षी दलों के समूह ‘इंडिया’ में फूट के डर से जरूर दिल्ली ने मुख्यमंत्री के हाथ बांध दिए हैं, वरना कन्नड़ लोगों का जीवन सुधारने वाले विधेयक को दरकिनार करने का फैसला वे कैसे ले सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस सरकार तथा मुख्यमंत्री ने जनता का ध्यान भटकाने और महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम (केएमवीएसटीडीसी) और मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) घोटालों की जांच को गुमराह करने के लिए ‘कन्नड़ समर्थक विधेयक’ को रोके रखा तो राज्य की जनता कांग्रेस नेताओं को कभी माफ नहीं करेगी।

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