जम्मू/नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर जम्मू कश्मीर के महानिदेशक (कारागार) हेमंत के. लोहिया की हत्या के आरोपी घरेलू सहायक ने हत्या के बाद घटनास्थल से भागने से पहले आत्महत्या करने की कोशिश की थी। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
जम्मू क्षेत्र के रामबन इलाके के रहने वाले 23 वर्षीय घरेलू सहायक यासिर लोहार से पुलिस की एक टीम ने मनोवैज्ञानिकों के साथ उसकी मानसिक स्थिति का पता लगाने के लिए गहन पूछताछ की। इसके बाद मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है।
भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 1992 बैच के अधिकारी लोहिया की तीन अक्टूबर को रात्रि भोजन के बाद जम्मू शहर के बाहरी इलाके उदयवाला में उनके दोस्त के घर पर गला रेतकर हत्या कर दी गई थी।
फॉरेंसिक विशेषज्ञों के साथ वारदात स्थल की जांच करने वाले अधिकारियों ने कहा कि एक टूटी हुई बेल्ट छत से लटकी मिली और लोहार ने जो बताया उसके मुताबिक उसने लोहिया को केचप की टूटी हुई बोतल की मदद से मारने के बाद आत्महत्या करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि लोहार का मनोवैज्ञानिक परीक्षण किया गया, क्योंकि ऐसा लग रहा था कि सरकारी नौकरी की उम्मीद पूरी नहीं होने के बाद उसने गुस्से में आकर इसे अंजाम दिया।
लोहार हत्या में मुख्य संदिग्ध के रूप में सामने आया है, क्योंकि वह अपराध के बाद से गायब था और बाद में सीसीटीवी फुटेज में उसे पिछले दरवाजे का उपयोग करके घर से भागते हुए देखा गया था। आरोपी ने जलते हुए तकिए को फेंककर अधिकारी के शव को जलाने का भी प्रयास किया, जिससे परिवार और उनके गार्डों का ध्यान गया और वे दरवाजा तोड़कर वहां पहुंचे।
अधिकारियों ने कहा कि आरोपी ने अधिकारी की हत्या करने के बाद आत्महत्या का प्रयास किया, लेकिन उसके गले में बंधी बेल्ट उसके वजन के कारण टूट गई। बाद में, वह पिछले दरवाजे से भाग गया, क्योंकि अन्य लोग अंदर आ गए थे। उसके गले पर भी बेल्ट के निशान मिले हैं।
अधिकारियों ने कहा स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ चुके लोहार की पिछले दो साल की गतिविधियों की पड़ताल पर पता चला कि वह अपने पैतृक गांव से भाग गया था। इसके बाद वह एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के साथ रसोइया के रूप में काम कर रहा था और लगभग छह महीने पहले लोहिया के दोस्त के घर में काम पर आया।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी के आवास से निकलने के बाद, उसने निकाले जाने से पहले एक दिन के लिए एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के यहां बगीचे में काम किया था। डॉक्टरों की टीम के हवाले से अधिकारियों ने दावा किया कि आरोपी चिकित्सकीय रूप से सामान्य था, लेकिन उसे अक्सर गुस्सा आता था और हिंसक व्यवहार की प्रवृत्ति थी और वह गंभीर अवसाद से पीड़ित था।
आरोपी से उसकी निजी डायरी के बारे में भी सवाल किया गया, जिसमें उसने फिल्म ‘आशिकी 2’ का एक पूरा गाना - ‘‘भुला देना मुझे, है अलविदा तुझे’’ लिखा था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी जीवन से तंग आ चुका था।
हिंदी और टूटी फूटी अंग्रेजी में उसने अपनी डायरी में कुछ पंक्तियां लिख रखी थी, ‘‘आई वांट रिस्टार्ट माय लाइफ’’, ‘जिंदगी तो बस तकलीफ देती है, सुकून तो मौत ही देती है’ और ‘‘हर दिन उम्मीद से शुरू होता है, लेकिन बुरे अनुभव पर खत्म होता है।’’
उसने लिखा कि वह अपने जीवन में ‘‘99 प्रतिशत दुखी’’ था, लेकिन उसने ‘‘100 प्रतिशत नकली मुस्कान ओढ़ रखी है। आरोपी ने डायरी में लिखा, ‘‘मैं 10 प्रतिशत खुश हूं, जिंदगी में जीरो प्रतिशत प्यार और 90 प्रतिशत तनाव। मुझे अपने जीवन से नफरत है, जो केवल दर्द देता है और मेरे जीवन को फिर से शुरू करने के लिए मृत्यु की प्रतीक्षा है।’’
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