रांची, 12 जनवरी झारखंड उच्च न्यायालय ने हड़ताल का आह्वान करने और इस दौरान न्यायालय के समक्ष पेश होने वाले अधिवक्ताओं को नोटिस भेजने के संबंध में राज्य बार काउंसिल के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका पर बृहस्पतिवार को गौर किया।
उच्च न्यायालय के सामने पेश होने के लिए सात वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी देने वाले बार काउंसिल के नोटिस पर रोक लगाते हुए अदालत ने फैसला सुनाया कि मामले को आगे की कार्यवाही के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार सिन्हा ने न्यायमूर्ति आनंद सेन की पीठ के समक्ष अवमानना याचिका दायर की थी।
उच्चतम न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के एक निर्देश का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि बार काउंसिल हड़ताल नहीं कर सकती और यह अवैध है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में झारखंड राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष को नोटिस जारी किया है।
अदालती शुल्क में बढ़ोतरी के विरोध में बार काउंसिल छह जनवरी से हड़ताल पर है। बुधवार को बार काउंसिल ने घोषणा की कि हड़ताल 13 जनवरी तक जारी रहेगी। काउंसिल ने अदालती शुल्क में वृद्धि के फैसले को वापस लेने की मांग की है।
इस बीच बार काउंसिल ने बृहस्पतिवार को झारखंड उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के सचिव को नोटिस जारी कर सात अधिवक्ताओं के उच्च न्यायालय में पेश होने की पुष्टि करने की मांग की है। नोटिस में कहा गया है कि बार काउंसिल उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर सकती है।
बार काउंसिल ने जिन सात अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दी है, उनमें अतिरिक्त महाधिवक्ता आशुतोष आनंद, राज्य के पूर्व महाधिवक्ता अनिल कुमार सिन्हा के अलावा इसके सदस्य नीलेश कुमार, मनोज कुमार मिश्रा, एनके गंझू, जितेंद्र कुमार पांडेय और शैलेंद्र कुमार तिवारी शामिल हैं।
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