छत्रपति संभाजीनगर, 21 अगस्त मराठा आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व करने वाले मनोज जरांगे ने बुधवार को कहा कि वह महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति का अभी खुलासा नहीं करेंगे क्योंकि सत्तारूढ़ दल इस योजना का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
जरांगे ने 29 अगस्त की बैठक भी स्थगित कर दी, जिसमें उन्हें चुनावों पर निर्णय की घोषणा करनी थी।
जरांगे ने दावा किया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम में जानबूझकर देरी की जा रही है और उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना भी जताई।
जरांगे ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम चुनाव से 45 से 60 दिन पहले ही अपनी रणनीति घोषित करेंगे, क्योंकि हम नहीं चाहते कि सरकार हमारे राजनीतिक कदमों का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करे।’’
जरांगे मराठा समुदाय के लोगों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की श्रेणी में शामिल कर आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने अनिश्चितकालीन अनशन और रैलियां भी की हैं।
उन्होंने दावा किया, ‘‘शासक, विशेषकर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, 29 अगस्त को हमारे निर्णय के आधार पर अपने अभियान की योजना बनाना चाहते हैं।’’
जरांगे ने कहा कि मराठा समुदाय को निर्वाचन क्षेत्रवार बैठकें आयोजित करने और कुनबी प्रमाण पत्र के लिए दस्तावेज खोजने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनावों में जानबूझकर देरी की जा रही है, क्योंकि सरकार को मराठा, दलित, धनगर, ओबीसी और मुसलमानों सहित विभिन्न समुदायों में उसके प्रति व्याप्त रोष महसूस हो गया है।
जरांगे ने कहा, ‘‘हम हमारे खिलाफ हमारी रणनीति का इस्तेमाल करने का मौका (भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) को नहीं देंगे। हम 29 अगस्त की बैठक और घोषणा को स्थगित कर रहे हैं।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY