देश की खबरें | जम्मू-कश्मीर सीबीआई ने कांस्टेबल ‘यातना’ मामले में डीएसपी और अन्य पांच के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की

नयी दिल्ली, 28 जुलाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दो साल पहले एक साथी पुलिस कांस्टेबल को हिरासत में लेकर ‘क्रूर और अमानवीय यातना’ देने के मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के छह अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

अधिकारियों ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पर दर्ज प्राथमिकी में केंद्रीय एजेंसी ने पुलिस उपाधीक्षक एजाज अहमद नाइको और पांच अन्य को नामजद किया है, जो उस समय संयुक्त पूछताछ केंद्र, कुपवाड़ा में तैनात थे।

अधिकारियों के मुताबिक प्राथमिकी में नामजद अधिकारियों में डीएसपी नाइको के अलावा उप निरीक्षक रियाज अहमद और चार अन्य जहांगीर अहमद, इम्तियाज अहमद, मोहम्मद यूनिस और शाकिर अहमद शामिल हैं। आरोप है कि इन्होंने कांस्टेबल खुर्शीद अहमद चौहान को छह दिन तक कथित तौर पर हिरासत में रखकर ‘क्रूर और अमानवीय यातनाएं’ दीं।

पीड़ित घटना के समय में बारामूला में तैनात था। उसे 17 फरवरी, 2023 को एक सिग्नल संचार के माध्यम से बुलाया गया था, ताकि मादक पदार्थ मामले के संबंध में जांच के लिए एसएसपी, कुपवाड़ा के समक्ष रिपोर्ट किया जा सके।

चौहान की पत्नी द्वारा दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया कि मौके पर पहुंचने के बाद उसके पति को संयुक्त पूछताछ केंद्र को सौंप दिया गया, जहां नाइको, रियाज अहमद और अन्य ने खुर्शीद को छह दिनों तक लोहे की छड़ों और डंडों से पिटाई की उसे बिजली के झटके दिए।

शिकायत के मुताबिक, ‘‘आखिरकार 26 फरवरी, 2023 को खुर्शीद के गुप्तांग काट दिए गए और उसके निजी अंगों में छह दिनों तक लगातार लोहे की छड़ें डाली गईं। खुर्शीद को गंभीर यातनाएं दी गईं और उसके मलाशय में लाल मिर्च डाली गई तथा बिजली के झटके भी दिए गए।’’

खुर्शीद की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर सीबीआई द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन एसएसपी, कुपवाड़ा, जिनके कहने पर पीड़ित को मादक पदार्थ मामले में जांच के लिए बारामूला से कुपवाड़ा भेजा गया था, मूकदर्शक बने रहे। खुर्शीद अपने पति के खिलाफ कथित अत्याचारों की जांच के लिए दर-दर भटक रही थीं।

एजेंसी ने अपनी प्राथमिकी में एसएसपी को आरोपी के रूप में नामित नहीं किया है।

खुर्शीद ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय द्वारा सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका खारिज किए जाने के बाद अपनी पीड़ा बताते हुए एक याचिका के साथ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

उच्चतम न्यायालय ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के साथ-साथ खुर्शीद को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया, जो संबंधित अधिकारी से वसूला जाएगा।

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