एजेंसी न्यूज

देश की खबरें | जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग: विदेश मंत्रालय ने चीन को जवाब देते हुए कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख देश के अभिन्न हिस्से ‘‘रहे हैं, हैं और रहेंगे।’’ इसने चीन को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि उसे उम्मीद है कि देश भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करेंगे जैसा कि वे दूसरों से अपेक्षा करते हैं।

देश की खबरें | जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग: विदेश मंत्रालय ने चीन को जवाब देते हुए कहा
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख देश के अभिन्न हिस्से ‘‘रहे हैं, हैं और रहेंगे।’’ इसने चीन को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि उसे उम्मीद है कि देश भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करेंगे जैसा कि वे दूसरों से अपेक्षा करते हैं।

वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के भारत की ओर बुनियादी ढांचे के विकास पर चीन की आपत्ति पर एक कड़ा संदेश देते हुए भारत ने कहा कि चीन को उसके आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।

यह भी पढ़े | Bihar Assembly Election 2020: कांग्रेस ने थीम सॉन्ग के जरिए नीतीश सरकार से किया सवाल- का किए हो?.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव का यह बयान चीन की इस टिप्पणी की प्रतिक्रिया में आया है कि वह केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश राज्य को मान्यता नहीं देता।

चीन के प्रवक्ता ने यह दावा भी किया कि भारत द्वारा सीमा पर बुनियादी विकास दोनों देशों के बीच तनाव की मूल वजह है।

यह भी पढ़े | Earthquake in Manipur: मणिपुर के बिष्णुपुर में महसूस किया गया भूकंप का झटका, तीव्रता 3.5 की गई दर्ज.

श्रीवास्तव ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘‘इस पर हमारा रुख हमेशा स्पष्ट और एक जैसा रहा है। केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा रहे हैं, हैं और रहेंगे। चीन को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि देश भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करेंगे जैसा कि वे दूसरों से अपेक्षा करते हैं।’’

श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का ‘अभिन्न’ हिस्सा है।

उन्होंने कहा, ‘‘अरुणाचल प्रदेश पर भी हमारा रुख कई बार स्पष्ट किया जा चुका है। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। यह बात चीनी पक्ष को सर्वोच्च स्तर तक कई बार स्पष्ट रूप से बताई जा चुकी है।’’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में अनेक नये पुलों का उद्घाटन किया था जिसके बाद चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि चीन, भारत द्वारा ‘अवैध तरीके से स्थापित’ केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख को और अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता।

वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और चीन सीमा गतिरोध को हल करने के लिए वार्ता कर रहे हैं और यह दोनों देशों के बीच की गोपनीय बात है।

एक ऑनलाइन सम्मेलन के दौरान चीन के साथ चल रही वार्ता के नतीजे के बारे में विशेष तौर पर पूछे जाने पर विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘चर्चा चल रही है और यह कार्य प्रगति पर है।’’

जब ‘ब्लूमबर्ग इंडिया इकोनॉमिक फोरम’ में उनसे सीमा की स्पष्ट स्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘वार्ता चल रही है और यह दोनों देशों के बीच की कुछ गोपनीय बात है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं सार्वजनिक रूप से बहुत ज्यादा कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूं। मैं निश्चित रूप से इसके लिए पहले से कोई अनुमान नहीं लगाना चाहता हूं।’’

तिब्बत की स्थिति के साथ-साथ एलएसी के घटनाक्रम के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि हमें अन्य मुद्दों पर विचार करना चाहिए, जिनका स्पष्ट रूप से लद्दाख में वर्तमान स्थिति से कोई लेना-देना नहीं है।’’

जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत चीन के साथ व्यापार संबंधों को कम करने की ओर देख रहा है तो उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया लेकिन कहा कि संबंध की नींव को हिलाने के परिणाम सामने आयेंगे।

उन्होंने कहा कि सीमा पर शांति की बहाली सभी के लिए अच्छी होगी, लेकिन उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच लगभग दो दशकों से व्यापार के मुद्दे हैं।

गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में लगभग पांच महीनों से भारत और चीन के बीच सैन्य गतिरोध चल रहा है।

भारत द्वारा सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास पर चीन की आपत्ति के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता श्रीवास्तव ने कहा कि यह लोगों की आजीविका और आर्थिक स्थिति में सुधार पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देता है और भारत की सुरक्षा और सामरिक आवश्यकताओं को पूरा करता है।

पूर्वी लद्दाख में सीमा पर गतिरोध और द्विपक्षीय सैन्य वार्ता के परिणामों पर श्रीवास्तव ने दोनों देशों की सेनाओं की ओर से 12 अक्टूबर को उनकी बातचीत के बाद जारी संयुक्त प्रेस वक्तव्य का जिक्र किया और इसे ‘सकारात्मक तथा लाभप्रद’ बताया।

श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया जटिल है जिसमें प्रत्येक पक्ष को उसके सैनिकों को एलएसी से उनकी नियमित चौकियों पर भेजना होता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दोनों पक्ष मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देने तथा एलएसी पर टकराव के सभी बिंदुओं से सैनिकों की पूरी तरह वापसी के परस्पर स्वीकार्य समाधान की दिशा में काम करने व भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति बहाली के लिहाज से हमारे नेताओं के मार्गदर्शन पर आधारित संवाद के वर्तमान माहौल को बनाये रखेंगे।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 15, 2020 10:53 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).